मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने ईशा फाउंडेशन योग केंद्र की तलाशी ली

कोयंबटूर जिले के एसपी के कार्तिकेयन ने कहा कि हमने हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर ईशा योग केंद्र में जांच की. समाज कल्याण विभाग, बाल कल्याण समिति आदि के अधिकारी भी जांच का हिस्सा थे. हम सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं. जांच बुधवार भी जारी रहेगी. अदालत में एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दायर की जाएगी.

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पुलिस ने ईशा फाउंडेशन योग केंद्र की तलाशी ली पुलिस ने ईशा फाउंडेशन योग केंद्र की तलाशी ली

शिल्पा नायर

  • चेन्नई,
  • 02 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 3:53 AM IST

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र की तलाशी ली. रिटायर्ड प्रोफेसर एस कामराज की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जवाब में पुलिस ने जांच शुरू की है, जिन्होंने दावा किया था कि उनकी 2 बेटियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध केंद्र में रखा गया था.

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कामराज ने आरोप लगाया कि केंद्र व्यक्तियों का ब्रेनवॉश कर रहा था, उन्हें साधु बना रहा था और उन्हें अपने परिवारों से संपर्क बनाए रखने से रोक रहा था. हालांकि कोर्ट की सुनवाई के दौरान दोनों महिलाओं ने अदालत को बताया कि वे स्वेच्छा से योग केंद्र में रह रही थीं.

जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और वी शिवगनम की बेंच ने केंद्र में चल रही प्रथाओं पर सवाल उठाए, जिसमें पूछा गया कि जग्गी वासुदेव युवा महिलाओं को साधु के रूप में रहने के लिए क्यों प्रोत्साहित करते हैं, जबकि उनकी अपनी बेटी विवाहित और घर बसा चुकी हैं.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि फाउंडेशन के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं, जिसमें हाल ही में ईशा योग केंद्र से जुड़े एक डॉक्टर पर पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. कोर्ट ने सरकार को इन मामलों पर एक व्यापक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 4 अक्टूबर की समय सीमा तय की है.

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आज भी जारी रहेगी जांचः कोयंबटूर एसपी

वहीं, आजतक से बात करते हुए कोयंबटूर जिले के एसपी के कार्तिकेयन ने कहा कि हमने हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर ईशा योग केंद्र में जांच की. समाज कल्याण विभाग, बाल कल्याण समिति आदि के अधिकारी भी जांच का हिस्सा थे. हम सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं. जांच बुधवार भी जारी रहेगी. अदालत में एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दायर की जाएगी.

ईशा फाउंडेशन ने आरोपों को बताया निराधार 

इस बीच ईशा फाउंडेशन ने एक बयान जारी कर आरोपों को निराधार बताया है. बयान में कहा गया है कि ईशा फाउंडेशन की स्थापना सद्गुरु ने लोगों को योग और आध्यात्मिकता प्रदान करने के लिए की थी. हमारा मानना ​​है कि वयस्क व्यक्तियों के पास अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता और बुद्धि है. फाउंडेशन ने लोगों पर शादी या संन्यास लेने के लिए दबाव डालने से इनकार किया और कहा कि ये व्यक्तिगत विकल्प हैं.

बयान में याचिकाकर्ता से जुड़े पिछले कानूनी टकरावों का भी जिक्र किया गया है. जिसमें उन पर और अन्य लोगों पर झूठे बहाने से उनके परिसर में घुसने का प्रयास करने और निराधार शिकायत दर्ज करने का आरोप लगाया गया है. फाउंडेशन ने साफ किया कि अदालत ने पहले ही उस मामले पर फाइनल पुलिस रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर रोक लगा दी है और दोहराया कि उनके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला नहीं है. बयान में कहा गया है कि जो कोई भी फाउंडेशन के खिलाफ गलत सूचना फैलाने में लिप्त है, उसके खिलाफ देश के कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा. 
 

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