देश में पिछले कई महीनों से किसानों का आंदोलन जारी है. हालांकि कोरोना के बढ़ते प्रकोप की वजह से उनका आंदोलन थोड़ा कमजोर जरूर पड़ा है, लेकिन किसान अभी भी अपनी मांगों के साथ डटे हुए हैं. वे अभी भी केंद्र से अपील कर रहे हैं कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए. अब इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के पंजाब प्रमुख भगवंत मान और दिल्ली से विधायक तथा पंजाब मामलों के पार्टी सह प्रभारी राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ फिर से बातचीत शुरू करने का आनुरोध किया है.
पंजाब से सांसद भगवंत मान और दिल्ली से विधायक राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने पत्र में कहा कि पिछले करीब 6 महीनों से पंजाब समेत अलग-अलग प्रदेशों के किसान दिल्ली की सरहदों पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इस संघर्ष के दौरान किसान अब तक अपने 470 साथियो को खो चुके हैं जो कि अति दुर्भाग्यपूर्ण और दर्दनाक है.
22 जनवरी के बाद से बातचीत नहीं
‘आप’ नेताओं ने कहा कि भले ही इस समस्या का हल निकालने के लिए किसान और केंद्र के बीच 11 बार की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई भी निष्कर्ष नहीं निकला है. सरकार ने इस साल 22 जनवरी के बाद किसानों के साथ बातचीत की कोई भी कोशिश नहीं की, जो किसानों समेत पूरे राष्ट्र हित में ठीक नहीं है.
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं और खेती के बिना इस देश की कल्पना भी नहीं की जा सकती. मौजूदा कोरोना काल के दौरान भी कृषि क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में जबरदस्त मंदी दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि देश का अनाज भंडार भरने समेत हर क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने वाले देश के किसानों को कोरोना काल में अपनी जान पर खेल अपनी मांगों के लिए रोष प्रदर्शन करना पड़ रहा है.
क्लिक करें- बढ़ते कोरोना के बीच राकेश टिकैत की दो टूक- किसी सूरत में नहीं खत्म होगा आंदोलन
'वापस लिए जाएं कृषि कानून'
अपने पत्र में ‘आप’ नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा कि अब जब किसान नेताओं की ओर से एक बार फिर बातचीत का न्योता दिया गया है तो प्रधानमंत्री को भी विनम्रता और खुले दिल के साथ इस बुलावे को कबूल करते हुए बातचीत शुरू करनी चाहिए और इस मसले का स्थायी हल निकालना चाहिए. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि समूचे देश और हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को कृषि क्षेत्र से सम्बन्धित तीनों कानून जरूर वापस लेने चाहिए.
aajtak.in