इस देश में गाड़ियों में लगा होता है 'अनूठा' सिस्टम, शराब पी तो कार स्टार्ट ही नहीं होती

भारत में सख्त कानून होने के बावजूद शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामलों में खास कमी नहीं आ रही है. दिल्ली के कंझावला कांड से सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत में लोगों में पकड़े जाने का डर कम है. ऐसे में जानना जरूरी है कि ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसा सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है जिससे अगर कोई ड्राइवर शराब पीता है तो गाड़ी स्टार्ट ही नहीं होती.

Advertisement
शराब पीकर गाड़ी चलाना गैरकानूनी है. (फाइल फोटो-Getty Images) शराब पीकर गाड़ी चलाना गैरकानूनी है. (फाइल फोटो-Getty Images)

सम्राट शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 04 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 7:20 PM IST

भारत में शराब पीने की मनाही नहीं है, लेकिन शराब पीकर गाड़ी चलाना गैरकानूनी है. हमारे देश में अक्सर फेस्टिव सीजन में शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाएं भी बढ़ जातीं हैं. 

हाल ही में दिल्ली के कंझावला में भी इसी वजह से एक लड़की की मौत हो गई. पांच आरोपी शराब पीकर गाड़ी चला रहे थे. शराब के नशे में उन्होंने स्कूटी को टक्कर मार दी. वो नशे में इतने धुत थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनकी गाड़ी के नीचे वो लड़की फंस गई है और घसीटती जा रही है.

Advertisement

इस घटना से सवाल उठता है कि ऐसा करते हुए पकड़े जाने का डर इतना कम है कि लोग नशे की हालत में गाड़ी चलाते हैं और इससे न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरे की जान भी जोखिम में डालते हैं.

2019 में मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया गया था. इसमें शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने पर जुर्माने की रकम को दो हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया था. पहली बार नशे में गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने पर 6 महीने तक की कैद और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है. वहीं, दूसरी बार पकड़े जाने पर दो साल तक की जेल और 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. जुर्माना बढ़ाने के बावजूद लोग बड़े आराम से शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं.

Advertisement

दुनिया के लगभग सभी देशों में शराब पीकर या नशे की हालत में गाड़ी चलाना अपराध है और ऐसा करने पर जुर्माना वसूला जा सकता है. यूके में जुर्माने की रकम तय नहीं है और सुनवाई के बाद जज अपराधी से कितना भी जुर्माना वसूल सकते हैं. वहीं, स्वीडन में दो साल तक की सजा हो सकती है. इतना ही नहीं, अगर गंभीर मामला है तो दो साल या उससे ज्यादा समय के लिए लाइसेंस भी फ्रीज हो जाता है.

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में नशे की हालत में गाड़ी चलाने वालों को पकड़ने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहां 'इग्निशन इंटरलॉक सिस्टम' टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. अगर कोई शराब पीकर गाड़ी में बैठता है तो इस सिस्टम की वजह से कार स्टार्ट ही नहीं होती. 

ऑस्ट्रेलिया ब्रेथएनालाइजर के मुताबिक, कार को स्टार्ट के लिए आपको ब्रेथ सैम्पल देना पड़ता है. ये ठीक वैसा ही होता है जैसा हमारे देश में ब्रेथ एनालाइजर से अल्कोहल की मात्रा का पता लगाया जाता है. इग्रनिशन इंटरलॉक सिस्टम में ड्राइवर को ब्रेथ सैम्पल देना होता है और अगर तय मात्रा से कम अल्कोहल है या नहीं है तो ही गाड़ी स्टार्ट होगी. इंटरलॉक सिस्टम में एक कैमरा भी है जो सैम्पल देने वाले ड्राइवर की तस्वीर लेता है.

Advertisement

न्यू साउथ वेल्स कम्युनिटी ने रोड सेफ्टी प्लान 2021 के तहत एक सर्वे भी किया था. इस सर्वे में शामिल 84 फीसदी लोगों ने रोड सेफ्टी के लिए इंटरलॉक सिस्टम को अहम माना था.

शराब पीकर गाड़ी चलाना न सिर्फ ड्राइवर या कार में सवार बैठे लोगों के लिए खतरनाक है, बल्कि आसपास गाड़ी चला रहे दूसरे लोग या पैदल चलने वालों के लिए भी खतरनाक है. आंकड़े बताते हैं कि भारत में शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से होने वाले सड़क हादसों में थोड़ी कमी जरूर आई है.

सड़क और परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, 2017 में शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से 14,071 सड़क हादसे हुए थे, जिनकी संख्या 2021 में घटकर 9,150 हो गई. वहीं, 2017 में इस वजह से 4,776 लोगों की जान गई थी. जबकि, 2021 में 3,314 लोगों की मौत का कारण शराब पीकर गाड़ी चलाना था.

इतना ही नहीं, कुल सड़क हादसों में शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से होने वाले हादसों की हिस्सेदारी में भी कमी आई है. 2017 में कुल हादसों में 3 फीसदी हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से हुए थे, जो 2021 में घटकर 2.2 फीसदी हो गए.

कई लोग ऐसा दावा करते हैं कि थोड़ी सी शराब पीने के बावजूद उनका अपने ऊपर पूरा कंट्रोल रहता है और वो अच्छे से गाड़ी चला सकते हैं. लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि अगर ब्लड में अल्कोहल की थोड़ी सी भी मात्रा है तो इससे ड्राइवर का ध्यान भटक सकता है और वो रिस्क की पहचान नहीं कर पाता. 

Advertisement

WHO का मानना है कि खून में शराब की मात्रा ज्यादा होने पर सड़क दुर्घटनाएं और भी गंभीर हो सकती हैं. ये उस समय ज्यादा खतरनाक हो जाती है जब वाहन की रफ्तार ज्यादा हो और सड़कें खराब हों.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement