Tauktae तूफान ने देश के कुछ राज्यों में भारी तबाही का मंजर दिखाया था. अब इस तूफान का सबसे ज्यादा असर जरूर गुजरात पर रहा, लेकिन सबसे बड़ी घटना P-305 शिप के साथ हुई थी जो उस तूफान की वजह से अरब सागर में डूब गई. अब नौसेना के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था और कई लोगों की जान बचाई भी जा सकी. इस घटना में एक पेंटर ने भी शिप से कूदकर अपनी जान बचाई थी. अब आजतक ने उस पेंटर से खास बातचीत की है.
कैसे डूबा था P-305 शिप?
अमित कुशवाह बार्ज पी-305 जहाज पर पेंटर के पद पर तैनात थे. अमित बताते हैं कि ड्यूटी के दौरान उन्हें तूफान की जानकारी मिली. उन्हें बताया गया कि तूफान Tauktae की स्पीड 60 किलो मीटर प्रतिघंटा की है.
इस सूचना के बाद बार्ज को प्लेटफॉर्म से हटाकर 200 मीटर दूर खड़ा कर दिया गया था. तूफान की वजह से जहाज पूरी रात हिलता रहा. हिलने-डुलने के कारण जहाज की कैंटीन में आग लग गई. 16 मई की सुबह सभी लोग कैंटीन में नाश्ता करने के लिए पहुंचे तो आग लगने की जानकारी मिली. इसके बाद जहाज पर नाश्ता न मिलने की घोषणा कर दी गई.
क्लिक करें- Barge P-305: रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, 66 शव बरामद, 21 लोग अब भी लापता
कूदकर जान बचाने वाले की आपबीती
लेकिन इसके बाद तूफान ने अपना असली कहर दिखाना शुरू किया और तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया. इस बारे में अमित बताते हैं कि तेज हवाओं की वजह से जहाज के सभी एंकर टूट गए. जब ऐसा लगा कि बार्ज पी-305 प्लेटफॉर्म से टकरा सकता है तो उसमें मौजूद सभी लोगों ने लाइफ जैकेट पहन ली. अचानक तेज हवाओं की वजह से जहाज में छेद हो गया और उसमें पानी भरने लगा. करीब 4 बजे लोगों ने जहाज से कूदना शुरू कर दिया. मैं भी उन्हें देख लाइफ जैकेट के सहारे कूद गया.
नौसेना बन गई थी देवदूत
अमित की माने तो वे कई घंटों तक ऐसे ही लाइफ जेकेट के सहारे समुद्र में तैरते रहे लेकिन उन्हें अपने बचने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं पड़ रही थी. उफान मारती लहरों के बीच उन्होंने ऐसा कभी नहीं सोचा था कि वे जिंदा भी बच पाएंगे. लेकिन क्योंकि भारतीय नौसेना बड़े स्तर पर रेस्क्यू कर रही थी, ऐसे में अमित को भी सुरक्षित बचा लिया गया और आज वे अपने परिवार संग हैं और सभी को इस आपबीती के बारे में विस्तार से बताते दिख रहे हैं.
नीरज श्रीवास्तव