एक साल की बच्ची को इलाज के लिए मुफ्त मिली 16 करोड़ की दवा, यूं हुआ चमत्कार

जीन थेरेपी के लिए जैनब के माता-पिता फंड जुटाने की कोशिशों में लगे थे. इसमें इस्तेमाल होने वाली जोल्गेन्स्मा (Zolgensma) की सिंगल डोज 16 करोड़ रुपये की है.

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जैनब संग उसके माता-पिता और डॉक्टर जैनब संग उसके माता-पिता और डॉक्टर

प्रमोद माधव

  • नई दिल्ली,
  • 27 जून 2021,
  • अपडेटेड 6:17 PM IST
  • जैनब नाम की बच्ची को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी थी
  • बच्ची को इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये की दवा चाहिए थी

ऊपरवाला जब आपकी मदद करना चाहता है, तो वह किसी भी रूप में आ सकता है. जैनब के परिवार को भले पहले इस बात पर यकीन ना हो, लेकिन शनिवार को जो उनके साथ हुआ, उसके बाद उनकी सोच जरूर बदल गई होगी. तमिलनाडु के कोयंबटूर में पैदा हुई एक साल की बच्ची जैनब दुर्लभ आनुवंशिक विकार के साथ दुनिया में आई.

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रीढ़ की हड्डी की इस दिक्कत को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy) कहते हैं. इसके लिए जीन थेरेपी होती है, जिसके लिए इस्तेमाल होने वाली दवा 16 करोड़ रुपये की आती है. जैनब के घरवालों के पास इलाज के लिए इतने रुपये नहीं थे. लेकिन उन्हें यह चमत्कारी दवा जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपये थी, वह लॉटरी के ड्रॉ में मुफ्त मिल गई.

यह एक साल की बच्ची जैनब का नसीब ही है जो इलाज की दवा इस तरह मिल गई.  Spinal Muscular Atrophy (SMA) में दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर विकार है जो नर्व सेल और मोटर न्यूरोन से संबंधित होता है. इससे मांसपेशियों का हिलना-डुलना प्रभावित होता है और उम्र के साथ स्थिति और ज्यादा खराब होती जाती है.

फंड जुटाने की कोशिशों में लगे थे जैनब के माता-पिता

जीन थेरेपी के लिए जैनब के माता-पिता फंड जुटाने की कोशिशों में लगे ही थे. इसमें इस्तेमाल होने वाली जोल्गेन्स्मा (Zolgensma) की सिंगल डोज 16 करोड़ रुपये की है. जैनब के पिता अब्दुल्ला को कहीं से पता चला था कि जोल्गेन्स्मा (Zolgensma) की डोज से कोई बच्चा ठीक हुआ था. फिर उन्होंने क्योर SMA नाम की संस्था में जैनब का भी नाम लिखवा दिया. यह संस्था SMA के इलाज में मदद जुटाने की कोशिश करती है.

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जोल्गेन्स्मा दवा 16 करोड़ रुपये की है

अब्दुल्ला और उनकी बीवी आयशा ने मदद के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कई सरकारी दफ्तरों का दरवाजा भी खटखटाया था. कपल ने 2018 में अपने पहले बच्चे को भी इसी SMA की वजह से खो दिया था. लेकिन शनिवार को अचानक अब्दुल्ला के पास एक फोन कॉल आया.

इसमें उन्हें बताया गया कि एक लक्की ड्रॉ में उनकी बेटी का नाम आ गया है, जिसमें जोल्गेन्स्मा दवा दी जाएगी. जैनब के साथ लक्की ड्रॉ के जरिए तीन अन्य बच्चों ने भी इलाज के लिए इस दवा को पाया. शनिवार को दोपहर 3.30 बजे के करीब जैनब को जोल्गेन्स्मा की खुराक दी गई. यह इलाज नई दिल्ली के श्री गंगा राम हॉस्पिटल में चल रहा है.

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