यूनानी और आयुर्वेदिक दवाओं के विज्ञापनों को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने याचिका दाखिल करने वाले एक युवा कानून छात्र को खुली अदालत में पढ़ाई पर ध्यान देने की नसीहत भी दी.
ये जनहित याचिका कानून के छात्र नितिन उपाध्याय ने दाखिल की है. याचिका में मांग की गई है कि ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट, 1954 को आज के हालात के मुताबिक बदला जाए. याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस कानून में यूनानी और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े विज्ञापनों को लेकर साफ और मजबूत नियम नहीं हैं, जिससे भ्रामक प्रचार पर रोक नहीं लग पा रही है.
सुनवाई के दौरान नितिन उपाध्याय के साथ उनके पिता और वरिष्ठ जनहित याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय भी अदालत में मौजूद थे. इस पर CJI सूर्यकांत ने अश्विनी उपाध्याय से पूछा, 'क्या ये याचिकाकर्ता आपका बेटा है?'
जब जवाब ‘हां’ मिला तो CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा,
'हमें लगा था कि इन्हें तो अब तक गोल्ड मेडल मिल चुके होंगे, लेकिन ये भी जनहित याचिका लेकर आ गए.'
इसके बाद CJI ने सीधे नितिन उपाध्याय से कहा, 'कानून की पढ़ाई अभी पूरी नहीं हुई है और आप PIL दाखिल करने आ गए हैं. पहले पढ़ाई पूरी कीजिए, अच्छे वकील बनिए. जाकर पढ़ाई करिए.'
पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी कहा कि याचिकाकर्ता को मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए और इसी सोच के साथ कोर्ट इस मामले में नोटिस जारी कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. याचिका में ये भी कहा गया है कि डॉक्टरों द्वारा दवाओं के विज्ञापन पर साफ नियम होने चाहिए, ताकि लोगों को गुमराह करने वाले दावों पर रोक लग सके.
कोर्ट की टिप्पणियों से साफ है कि वो जनहित के मुद्दों पर सुनवाई के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही ये भी संदेश देना चाहती है कि कानून के छात्रों को पहले अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण पर ध्यान देना चाहिए.
अनीषा माथुर / संजय शर्मा