प्रसिद्ध चित्रकार और कलाकार-क्यूरेटर बोस कृष्णमाचारी ने 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2023' में भाग लिया और खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि जब आप कल्चर बिल्डिंग, सोशल, राजनीतिक या अन्य विषयों की बात करते हैं तो सेक्युलर होना जरूरी हो जाता है. मुझे इस राज्य में कभी काम करने मे दिक्कत नहीं हुई क्योंकि इस तरह के कार्य करने के लिए फ्रीडम बहुत जरूरी है. कोच्चि-मुज़िरिस बिएनले फाउंडेशन के कृष्णामचारी ने कहा कि बिएनले को बनाने में लोगों का बहुत समर्थन मिला. 80 परसेंट पर्यटक यहां कल्चरल टूरिस्ट थे.
बोस कृष्णमाचारी ने बताया, 'हमने पहले सत्र में कई लोगों को अपनी प्रदर्शनी के लिए आमंत्रित किया. इसमें छात्र, बच्चे और अन्य लोग आमंत्रित थे. 2019 में हमने पांचवे सत्र की घोषणा की. तब कोरोना महामारी आ गई और हमने इसे 2020 तक स्थगित कर दिया. इसके बड़ी संख्या में आर्टिस्ट आए. हमें कला के प्रति लगाव रखने वाले लोगों, आर्टिस्ट द्वारा सपोर्ट किया जा रहा है तभी हम कर पा रहे हैं. '
एक वाकये का जिक्र करते हुए बिएनले के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'एक जगह पर मैं गया हुआ जहां प्रदर्शनी लगी थी. बाहर खेल रहे बच्चों को उस बिएनले के बारे में पता नहीं था. जब मैंने पूछा कि यहां क्या हो रहा है तो उनका जवाब था कि उन्हें नहीं पता क्या हो रहा है और बिएनले क्या होता है, मुझे बहुत दुख हुआ जिसके बाद मैंने तय किया कि ब्राउशर प्रिंट करवाकर इन्हें बच्चों, छात्रों के बीच बांटा जाएगा.... यह कोई चित्रकारी, कलाकारी ही नहीं बल्कि यह कई चीजों का मिश्रण हैं... उन्होंने बताया कि कैसे कोच्चि बिएनले के कलाकार देश ही नहीं अमेरिका, जापान जैसे देशों में में अपनी चमक बिखेर रहे हैं. '
उन्होंने कहा कि हर कोई आर्टिस्ट नहीं होता है लेकिन हर कोई आर्टिस्ट बन सकता है. मैंने केरल में कई टैलेंटेड लोग देखे हैं लेकिन उनके पास अपने हुनर को दिखाने का कोई मंच या रास्ता नहीं था.कई लोगों के साथ मुझे काम करने का मौका मिला. बोस कृष्णामाचारी ने कहा, 'अगर आप एक आर्टिस्ट हैं तो आपको स्पेस (जगह) के बारे में अच्छी तरह जानकारी होनी चाहिए. यदि आप आर्टिस्ट हैं तो आपको थ्योरी के बारे में पता होना चाहिए. प्रैक्टिस और थ्योरी साथ- साथ होनी चाहिए, ऐसा मेरा मानना है. आर्टिस्ट एक एडिटर होता है, जहां आपको पता होना चाहिए क्या रखना चाहिए क्या करना है..'
आपको बता दें कि कोच्चि-मुजिरिस बिएननेल समकालीन कला की एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी है जो कोच्चि शहर में आयोजित की जाती है. यह देश में सबसे बड़ी कला प्रदर्शनी है और एशिया में सबसे बड़ा समकालीन कला उत्सव है. इसे केरल सरकार द्वारा सपोर्ट किया जाता है. बिएननेल फाउंडेशन की एक पहल है. कोच्चि-मुज़िरिस बिएनले की अवधारणा का विचार और क्रियान्वयन डॉ. वेणु वासुदेवन आईएएस द्वारा किया गया था, जो केरल सरकार के संस्कृति सचिव थे. इसके सह संस्थापक बोस कृष्णामाचारी हैं. राज्य के कई जगहों पर इसके तहत प्रदर्शनी और शो आयोजित किए जाते हैं.
पहला कोच्चि-मुज़िरिस बिएनेल 12 दिसंबर 2012 को शुरू हुआ. तब बिएननेल ने लगभग 50 प्रतिशत विदेशी कलाकारों सहित 80 कलाकारों की मेजबानी की थी.
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