BJP से अलग हुई JJP तो क्या लगेगा दुष्यंत चौटाला के हाथ? ये मुद्दे हैं दरार की वजह

हरियाणा में बीजेपी और जननायक जनता पार्टी के बीच तकरार की खबरें सुर्खियों में हैं. सवाल उठ रहे हैं कि चार साल सरकार चलाने के बाद दोनों पार्टियां चुनावी साल से ठीक पहले अलग हो जाएंगी और क्या गठबंधन टूट जाएगा. अगर ऐसा होता है को दोनों ही पार्टियों को क्या हासिल होगा, यह बड़ा सवाल है. इस पूरे मामले में क्या है चुनावी रणनीति, जानिए यहां.

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डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, सीएम मनोहर लाल खट्टर (फाइल फोटो) डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, सीएम मनोहर लाल खट्टर (फाइल फोटो)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2023,
  • अपडेटेड 1:48 PM IST

हरियाणा में ऊचाना विधानसभा सीट को लेकर बीजेपी और जेजेपी गठबंधन में दरार पड़ती दिख रही है. हरियाणा बीजेपी के प्रभारी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लव देव का बयान इसकी वजह बना है. हरियाणा में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा था कि '2024 विधानसभा चुनाव में इस सीट से प्रेमलता जी को जिताकर विधानसभा भेजने की जिम्मेदारी आपकी है.

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ऊचाना से ही जीतकर डिप्टी सीएम बने हैं दुष्यंत चौटाला
दरअसल ऊचाना वही विधानसभा सीट है, जहां से अभी के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला चुनावी मैदान में उतरे थे और उन्होंने बीजेपी की उम्मीदवार प्रेमलता को 47452 वोटों के बड़े अंतर से हराया था. प्रेमलता पूर्व केंद्रीयमंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह की पत्नी हैं और उनके बेटे वर्तमान में हिसार से सांसद ब्रिजेंद्र सिंह हैं. चौधरी वीरेंद्र सिंह का परिवार पिछले कुछ समय से बीजेपी से नाराज चल रहा है और कई बार पार्टी लाइन से हटकर पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाले बयान भी देता रहा है. पहलवान आंदोलन के बीच भी उनकी तल्खी उभरकर सामने आई थी तो वहीं किसान आंदोलन के दौरान भी वह पार्टी की लीक से हटते दिख रहे थे. 

बिप्लव देव के बयान से गरमायी सियासत
बिप्लव देव ने चौधरी वीरेंद्र सिंह के परिवार की नाराजगी को दूर करने के लिए ऊचाना सीट से 2024 के विधानसभा चुनाव में प्रेमलता को जिताने की अपील की थी. उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बिप्लव देव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि किसी के पेट में दर्द है तो मै दर्द की दवाई तो नहीं दे सकता, न तो मेरे पेट में दर्द है और न ही मैं डॉक्टर हूं. बस फिर क्या था दुष्यंत चौटाला के बयान पर बिप्लव देव ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए तल्खीभरा जवाब दिया कि जेजेपी ने समर्थन देकर बीजेपी पर कोई एहसान नहीं किया है. उसके बदलें उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है और महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए गए हैं .

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हरियाणा प्रभारी ने चौटाला को दिया ये संदेश
बयानों और आरोप-प्रत्यारोपों के बीच बिप्लव देव मोर्चा ने संभालते हुए धर्मपाल गोदार, राकेश दौलताबाद, रणधीर सिंह, सोमवीर संगवान, नयनपाल रावत, हरियाणा सरकार में मंत्री रणजीत सिंह चौटाला और हरियाणा लोकहित पार्टी से विधायक गोपाल कांडा से मुलाकात कर ट्वीट करके कहा सभी 7 निर्दलीय विधायकों ने पीएम मोदी पर विश्वास जताते हुए हरियाणा में बीजेपी सरकार का साथ देने की बात कही थी. यानी बिप्लव देव ने इशारों ही इशारों में दुष्यंत चौटाला को संदेश दे दिया कि उनके जेजेपी के समर्थन के बिना भी हरियाणा में बीजेपी की सरकार पूरी धमक और ठसक के साथ 2024 तक अपना कार्यकाल पूरा करेगी .

हरियाणा में जीत के लिए चाहिए 46 विधानसभा सीटें
हरियाणा में 90 विधानसभा सीटे हैं और बहुमत के लिए 46 का जादुई आकड़ा चाहिए. बीजेपी के पास 41 विधायक, कांग्रेस के पास 30, जेजेपी के पास 10, इनलो से अभय चौटाला, 8 निर्दलीय और हरियाणा लोकहित पार्टी से गोपाल कांडा हैं. 7 निर्दलीय विधायकों और गोपाल कांडा ने बिप्लव देव से मुलाकात कर बीजेपी को खुला समर्थन का इशारा कर दिया है. ऐसे में जेजेपी से गठबंधन टूट भी जाता है तो बीजेपी के पास 7 निर्दलीय विधायकों और गोपाल कांडा की पार्टी एचएलपी के साथ आने के बाद विधायकों की संख्या 49 पहुच जाएगी. यानी कि बहुमत से 3 ज्यादा.

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2024 का चुनाव है महत्वपूर्ण
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि जेजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा में 3 लोकसभा सीटें चाहती है. 2019 में बीजेपी ने हरियाणा की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी रणनीतिकारों की माने तों 2024 का लोकसभा चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ विपक्ष एक-जुट होकर चुनाव लड़ सकता है, ऐसे में बीजेपी 2024 के चुनाव में किसी भी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है. इसलिए सभी 10 लोकसभा सीटो पर अपना उम्मीदवार उतराना चाहती हैं .

जेजेपी में नहीं लोकसभा चुनाव जीतने का आधार
बीजेपी के रणनीतिकारों का ये भी मानना है कि जेजेपी एक क्षेत्रीय दल है, वो भी हरियाणा जैसे प्रदेश में जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच में सीधा मुकाबला है, इनेलों से टूटकर बने जेजेपी में लोकसभा चुनाव जीतने का जनाधार नहीं हैं. इसलिए लोकसभा में बीजेपी को सभी 10 सीटों को जीतने की तैयारी अभी शुरू कर दी है. बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि 2024 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव जेजेपी के साथ गठबंधन में मिलकर गठबंधन में लड़े जा सकते हैं.

क्या कहते हैं जानकार
वैसे पार्टी सूत्रों का ये भी मानना है कि लोकसभा चुनाव से पहले यदि जेजेपी के साथ गठबंधन टूट जायेगा तो इसमें ना सिर्फ बीजेपी का फायदा बल्कि जेजेपी का भी लाभ है. इसके पीछे पार्टी सूत्रों का मानना है कि जेजेपी हरियाणा में जातीय समीकरणों के हिसाब से जाटों की राजनीति करती है. 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने भी कांग्रेस को जाटों का सबसे बड़े हितैषी के रूप में प्रस्तुत किया है. राजनैतिक पंडितों का मानना है कि हरियाणा में  बीजेपी जाट विरोधी राजनीति करती हैं.

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ये हो सकता है बीजेपी का प्लान
यदि जेजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अलग होती है तो अपने जाट वोट में कांग्रेस के द्वारा सेंध लगाने से बच सकती है. जेजेपी के जाने से बीजेपी जाट विरोधी छवि का फायदा उठाकर जातीय समीकरणों को साधते हुए बाकी जातियों को एक करके 2024 के चुनाव में 10 की 10 लोकसभा सीटें जीतकर 2019 का इतिहास दोहरा सकती है. जेजेपी सूत्रों की मानें लोकसभा चुनाव से पहले हरियाणा बीजेपी के प्रभारी बिप्लव देव के इन बयानों के पीछे कारण हैं. लोकसभा सीटों पर समझौते से पहले जेजेपी पर दबाव बनाया जाए, जिससे जेजेपी को उनकी डिमांड से कम सीटें दी जाएं.

एक तरफ विपक्षी एकता के जवाब में बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व 2024 से एनडीए का कुनबा बढ़ाने पर जोर दे रहा है, एनडीए छोड़कर गए पुराने एनडीए के सहयोगी दलों गठबंधन के साथ लाने और छोटे-छोटे नए दलों को एनडीए में जोड़ने का प्रयास कर रहा हैं. अब देखना ये है कि हरियाणा में जेजेपी गठबंधन तोड़ेगा या फिर लोकसभा चुनाव में जेजेपी कम सीट देने का दबाव बना रहा है.

 

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