रोज़गार का वादा कर बिहार सरकार लाठियां क्यों भांज रही है?: दिन भर, 4 जनवरी

रोज़गार का वादा कर बिहार सरकार लाठियां क्यों भांज रही है, क्या तेजस्वी यादव भी खो रहे अभ्यर्थियों का भरोसा, समाधान यात्रा से क्या हासिल करना चाहते हैं नीतीश कुमार, संदीप सिंह को लेकर हरियाणा सरकार का रुख कितना साफ और यरुशलम का अल-अक्सा मस्जिद विवाद वापस क्यों गरमाया, सुनिए 'दिन भर' में जमशेद कमर सिद्दीकी से.

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जमशेद क़मर सिद्दीक़ी

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  • 04 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 10:00 PM IST

भारत में इस वक़्त सर्दी और सियासी यात्राओं का मौसम है. राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कल से उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है. अब यूपी से सटे बिहार में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक यात्रा शुरू कर दी है. इसका नाम समाधान यात्रा रखा गया है, जो आज से लेकर 7 फरवरी तक चलेगी. इस दौरान वह 18 ज़िलों का दौरा करेंगे. नीतीश की इस यात्रा पर बयानबाज़ी भी खूब हो रही है. बीजेपी के विजय कुमार सिन्हा, बिहार में लीडर ऑफ़ ऑपोजिशन हैं, उन्होंने नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में प्रशासनिक अराजकता फैली हुई है और इस दौरान नीतीश की ये यात्रा उनकी विदाई को न्योता देगी. बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट जेपी नड्डा भी कल बिहार में थे. वैशाली ज़िले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बिहार की महागठबंधन की सरकार पर जमकर हमला बोला.

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नीतीश को मिलेगा 'समाधान'?

बीजेपी के हमलों पर पलटवार करते हुए जेडीयू ने कहा कि भाजपा को तो पूरे देश भर में पश्चाताप यात्रा निकालनी चाहिए क्योंकि इस पार्टी ने कभी बुनियादी मुद्दों की बात नहीं की है. वहीं, नीतीश कुमार के पूर्व सहयोगी और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने इस यात्रा पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश कुमार अब उम्र के इस पड़ाव पर सामाजिक और राजनीतिक तौर पर अकेले पड़ गए हैं, जहां वो इस आशा में हैं कि किसी तरह जनता की आंखों में धूल झोंक कर वोट हासिल कर लें और सत्ता में बने रहें. हालांकि प्रशांत किशोर ख़ुद भी बिहार में जनसुराज यात्रा निकाल रहे हैं. सरकार में नीतीश कुमार के डेप्युटी तेजस्वी यादव का भी इस यात्रा पर बयान आया और उन्होंने इसका समर्थन किया. 

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तो नीतीश कुमार की इस यात्रा के पीछे का मक़सद क्या है, सिर्फ 18 ज़िले में इस यात्रा के पीछे क्या कोई पैटर्न है और बिहार में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर नीतीश का क्या रुख़ है, सुनिए 'दिन भर' की पहली ख़बर में. 

 

मांगी नौकरी, मिली लाठी?

नीतीश कुमार खुद तो समाधान यात्रा निकाल रहे हैं लेकिन उनके ही राज्य के अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा. हज़ारों छात्र अपनी मांग लेकर सड़कों पर उतरते हैं और पुलिसिया लाठी के दम पर उनकी आवाज़ शांत कर दी जाती है. पिछले साल 15 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक घोषणा की. कहा कि 10 लाख नौकरी और 10 लाख रोज़गार दिए जाएंगे. उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी तब फैसले का स्वागत किया था. हालांकि ये कब तक होगा, इसकी कोई वादा नहीं किया गया. पांच महीने बाद अब नौकरी तो नहीं लेकिन अभ्यर्थियों पर लाठी चार्ज ज़रूर चल रही है. पटना में आज बिहार स्टाफ सिलेक्शन कमीशन पेपर लीक के विरोध में अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे थे और तभी पुलिस की लाठी उन पर चलने लगी.


दरअसल, 23 और 24 दिसंबर को Bihar SSC के CGL की परीक्षा आयोजित की गई. कुल दो हज़ार एक सो सतासी पदों के लिए नौ लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. मगर परीक्षा के बाद पेपर लीक की बात निकल आई और फिर अभ्यर्थी इसका विरोध करने लगे. आंकड़ों पर गौर करें तो पेपर लीक होने का ये कोई पहला मामला नहीं है बिहार में. इसी साल मई में ही BPSC का पेपर लीक हुआ जिससे छह लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए. 2021 बिहार बोर्ड की 10वीं कक्षा का पेपर लीक हुआ जिसके बाद सोशल साइंस के एग्जाम को दोबारा कंडक्ट कराना पड़ा. सरकार दावा तो करती है कि उसने पेपर लीक के मामले पर नकेल कसी है, लेकिन क्या ऐसा दिखाई पड़ता है, ये सवाल है. मगर सबसे पहले बात आज अभ्यर्थियों के प्रोटेट पर बात करते हैं, घटनाक्रम क्या रहा आज के प्रोटेस्ट का, उनकी मांगें क्या थी, सरकार का क्या कहना है और क्या रोज़गार के मुद्दे पर तेजस्वी यादव उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, सुनिए 'दिन भर' की दूसरी ख़बर में.

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मंत्री को बचा रही खट्टर सरकार?

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान हैं संदीप सिंह, हरियाणा सरकार में मंत्री रहे हैं और एक जूनियर महिला कोच ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. मामला बढ़ा तो संदीप से खेल विभाग से इस्तीफा दे दिया, मगर मंत्रालय में वो अभी भी बने हुए हैं. संदीप सिंह ने कहा कि जब तक जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपती, तब तक वो नैतिकता के आधार पर अपना खेल विभाग मुख्यमंत्री को सौंप रहे हैं. वहीं दूसरी ओर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर मामले पर अपने बयान को लेकर घिर गए हैं जिसमें उन्होंने महिला कोच के आरोप को अनर्गल बताया था.

वहीं, पीड़िता के वकील दीपांशू का कहना है कि जो धाराएं संदीप पर लगी हैं, उसके आधार पर उन्हें तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए था, मगर अब तक ऐसा हुआ नहीं है. हालांकि शिकायत के बाद हरियाणा के डीजीपी ने एक कमेटी का गठन ज़रूर किया गया था जो मामले की जांच कर रही है. इन सब के बीच महिला कोच ने संदीप को लेकर एक और खुलासा किया है और मामले ने और तूल पकड़ लिया है. आज कंप्लेंट करने के 4 दिनों बाद पहली मर्तबा चंडीगढ़ पुलिस संदीप के घर पर पूछताछ करने पहुंची और उन्हें समन भी जारी किया. इसके बाद कहा जा रहा है कि संदीप पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटकनी शुरू हो गई है. तो क्या वाकई संदीप सिंह की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, जांच को लेकर अब तक कितनी क्लैरिटी दिखाई देती है और खट्टर सरकार का रुख कितना साफ दिखाई पड़ रहा है, सुनिए 'दिन भर' की तीसरी ख़बर में.

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फिलिस्तीन-इज़राइल फिर लड़ेंगे?

कुछ दिनों से शांत चल रहा इज़राइल- फिलिस्तीन विवाद कल से फिर गरमाने लगा है. अभी छह दिन पहले इज़रायल में बेंजामिन नेतन्याहू फिर से प्रधानमंत्री बने हैं. उनके डिफेंस मिनिस्टर हैं इतामार बेन गविर. गविर को कट्टर दक्षिणपंथी नेता माना जाता है. अपनी इसी छवि को उन्होंने मंगलवार को पुख्ता कर दिया जब वो यरूशलम शहर की ऐतिहासिक अल अक्सा मस्जिद जा पहुंचे. ये मस्जिद मुस्लिमों के लिए तीसरा सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है. इसे लेकर मुसलमानों और यहूदियों में लंबे दौर तक खींचतान चली है. यही कारण है कि लॉ एंड ऑर्डर बरकरार रखने के लिए कई नेता इससे दूरी बनाए रखते हैं मगर गविर ने मस्जिद परिसर का दौरा किया जिससे इस्लामिक मुल्क भड़क गए.

सऊदी अरब ने इस दौरे की निंदा की तो यूएई ने भी कहा कि इजराइल को यरूशलेम की शांति भंग करने से बचना चाहिए. चीन, जॉर्डन और तुर्की भी इसी सुर में बोले. फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री मोहम्मद शतयेह का तल्ख रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने कहा कि ये मस्जिद को यहूदी मंदिर में बदलने का एक प्रयास है. फिलिस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास ने कहा कि ये कोशिशें संघर्ष को बढ़ाएंगी. हमास विवादित क्षेत्र गाज़ा में प्रभावशाली संगठन है और इजरायल से हिंसक संघर्ष में मुब्तिला रहता है.

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अब लग रहा है कि इस घटना के बाद फिर से फिलिस्तीन का मुद्दा टेंशन क्रिएट कर सकता है. तो इजराइली डिफेंस मिनिस्टर के दौरे पर जो ये बवाल हुआ.. क्या इज़राइली सरकार ने कुछ कहा है? और मुस्लिम देशों के एकदम भड़कने का क्या कारण है? इसके अलावा अल अक्सा मस्जिद को लेकर विवाद क्या है और नेतन्याहू के आने के बाद फिलिस्तीन और इस्लामिक देशों के बीच तनाव की स्थिति क्या और बढ़ सकती है, सुनिए 'दिन भर' की आख़िरी ख़बर में.
 

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