भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन का जल्द एम्स में होगा ट्रायल, जानिए BBV154 के बारे में सबकुछ

यह अपने आप में पहली ऐसी BBV154 कोरोना वैक्सीन है, जिसका ट्रायल भारत में इंसानों पर किया जाएगा. पहला ट्रायल 18 से 60 साल के उम्र के वॉलंटियर पर किया गया था. यह सफल रहा था. दूसरे चरण के नतीजों के बाद तीसरे चरण का ट्रायल होगा. एम्स में 2 से 18 साल के बच्चों पर भी कोवैक्सिन का सफल ट्रायल हो चुका है.

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अगस्त में भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को दूसरे ट्रायल की मंजूरी मिली थी (फाइल फोटो) अगस्त में भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को दूसरे ट्रायल की मंजूरी मिली थी (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST
  • 18 से 60 साल के उम्र के वॉलंटियर पर होगा ट्रायल
  • चार हफ्तों के अंतराल में दी जाएंगी दोनों डोज

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन (Nasal vaccine) BBV154 का जल्द ट्रायल करेगी. ये ट्रायल दूसरे और तीसरे चरण के होंगे. दुनिया के तमाम देशों में कोरोना की नाक के जरिए दी जाने वाली वैक्सीन को लेकर रिसर्च चल रही हैं. उधर, भारत में Bharat Biotech की नेजल वैक्सीन को अगस्त में दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) के लिए मंजूरी मिली थी. 

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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सूत्रों ने जानकारी दी है कि एम्स में नेजल वैक्सीन के ट्रायल अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो जाएंगे. ट्रायल की अनुमति के लिए एम्स की एथिक्स कमेटी के पास आवेदन दिया गया है. 

28 दिन में लगेंगे दोनों डोज

भारत बायोटेक की इस वैक्सीन के ​​ट्रायल के प्रमुख इन्वेस्टिगेटर डॉ संजय राय होंगे. एथिक्स कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद वॉलंटियर पर इस वैक्सीन के दोनों डोज चार हफ्तों के बीच में दिए जाएंगे. 

यह अपने तरह की पहली वैक्सीन

यह अपने आप में पहली ऐसी BBV154 कोरोना वैक्सीन है, जिसका ट्रायल भारत में इंसानों पर किया जाएगा. पहला ट्रायल 18 से 60 साल के उम्र के वॉलंटियर पर किया गया था. यह सफल रहा था. दूसरे चरण के नतीजों के बाद तीसरे चरण का ट्रायल होगा. एम्स में 2 से 18 साल के बच्चों पर भी कोवैक्सिन का सफल ट्रायल हो चुका है. 

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कैसे काम करती है नेजल स्प्रे वैक्सीन?

नेजल स्प्रे वैक्सीन को इंजेक्शन की बजाय नाक से दिया जाता है. यह नाक के अंदरुनी हिस्सों में इम्युन तैयार करती है. इसे ज्यादा कारगर इसलिए भी माना जाता है क्योंकि कोरोना समेत हवा से फैलने वाली अधिकांश बीमारियों के संक्रमण का रूट प्रमुख रूप से नाक ही होता है और उसके अंदरूनी हिस्सों में इम्युनिटी तैयार होने से ऐसे बीमारियों को रोकने में ज्यादा असरदार साबित होती है. 


 

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