कोरोना से मौत का ग्राफ गिरा नीचे, गुप्तेश्वर पांडेय के पास अब क्या ऑप्शन? सुनें 'आज का दिन'

भारत के अलावा अमेरिका और ब्राज़ील ही ऐसे हैं जहां एक लाख से ज़्यादा मौत हुई हैं. अब राहत की बात ढूँढे तो यही है कि मौत का ग्राफ़ पहले के मुक़ाबले नीचे गिरा है.

Advertisement
कोरोना टेस्ट करता मेडिकल स्टाफ (फाइल फोटो-PTI) कोरोना टेस्ट करता मेडिकल स्टाफ (फाइल फोटो-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST

इस महीने की दो तारीख़ को भारत ने एक मनहूस आँकड़ा पार किया. कोरोना से हुई एक लाख मौत का आँकड़ा. यही आँकड़ा पूरी दुनिया में फ़िलहाल दस लाख से भी ज़्यादा है, मतलब इस बीमारी से जान खोने वाले हर दस में से एक शख़्स का ताल्लुक़ भारत से है. भारत के अलावा अमेरिका और ब्राज़ील ही ऐसे हैं जहां एक लाख से ज़्यादा मौत हुई हैं. अब राहत की बात ढूँढे तो यही है कि मौत का ग्राफ़ पहले के मुक़ाबले नीचे गिरा है. इंडिया टुडे ग्रुप के पास एक डेटा इंटेलिजेंस यूनिट है. वो आँकड़ों का हिसाब किताब रखती है और उनके आधार पर सिचुएशन को समझती-समझाती है. उसी यूनिट के मेंबर निखिल रामपाल विस्तार में कुछ बातें समझा रहे हैं. 

Advertisement


आप अपने फ़ेवरेट सेलेब्स के बारे में अगर कुछ जानना चाहते हैं तो क्या करते हैं? इंटरनेट पर जाते होंगे. रैंडम कुछ लिखकर सर्च करते होंगे. फिर आपको ढेर सारी वेबसाइट्स के लिंक दिखते होंगे. उन पर क्लिक करते होंगे. है ना!!  अब ऐसा मत कीजिएगा वरना आप अपनी सारी पर्सनल इन्फ़ॉर्मेशन बिना चाहे शेयर कर बैठेंगे और क़िस्मत ख़राब रही तो नुक़सान इससे भी ज़्यादा होगा. जिन सेलिब्रिटीज़ को सर्च करने के दौरान ऐसी घटनाएँ ज़्यादा हो रही हैं उनकी एक लिस्ट साइबर सिक्योरिटी कंपनी McAfee ने बनाई है. नाम रखा है- most dangerous celebrity. इसमें बहुत सारे इंडियंस भी हैं. पहले नंबर पर तो स्टार फ़ुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैं, फिर नाम है तब्बू का, तापसी पन्नू का, अनुष्का शर्मा का, सोनाक्षी सिन्हा का. इनके अलावा हैं सिंगल अरमान मलिक, सारा अली खान, दिव्यांका त्रिपाठी जो सीरियल्स में दिखती हैं, शाहरुख़ खान और अरिजीत सिंह. तो हमने विराग गुप्ता से इस पर बात की. विराग सीनियर एडवोकेट हैं और उनकी एक्सपर्टीज़ IT और Cyber law में है. 

Advertisement

एक बात अक्सर कही जाती है. जब तक नई कंपनी से ज्वाइनिंग लैटर ना मिल जाए तब तक पुरानी नहीं छोड़नी चाहिए. बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे से यही गलती हो गई. लैटर उनको जेडीयू में ज्वाइनिंग का मिला था लेकिन असल बात थी टिकट की. वो उससे चूक गए और लग रहा है कि पिछली बार की कहानी इस बार भी रिपीट होगी. तब भी टिकट से महरूम रह गए थे, इस बार भी हो सकता है वही हो. संभावना थी कि वो बक्सर में कहीं से चुनाव लड़ेंगे लेकिन एनडीए में जो सीट बँटवारा हुआ है उसमें पांडे कहीं फ़िट नहीं हो पा रहे. ज़िले की चार में से दो सीटों डुमराव और राजपुर पर जेडीयू ने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं और बाक़ी दो पर बीजेपी ने भी अपने प्रत्याशियों के नामों का एलान कर दिया है. अब वहाँ तो कुछ बचा नहीं लेकिन हो सकता है गुप्तेश्वर पांडे को किसी और लिस्ट में अपना नाम देखने की उम्मीद हो. तो उनके पास अब ऑप्शन क्या हैं इसे लेकर हमारे सहयोगी रितुराज ने चर्चा की प्रभाष दत्ता से. प्रभाष हमारे सहयोगी हैं और बिहार चुनाव पर नज़र रखे हुए हैं और साथ ही सुनिए एक गाना जिसे आजतक ने तैयार किया है ख़ास बिहार चुनाव के लिए. 

Advertisement


और ये भी जानिए कि 8 अक्टूबर की तारीख इतिहास के लिहाज़ से अहम क्यों है.. क्या घटनाएं इस दिन घटी थीं. अख़बारों का हाल भी पांच मिनटों में सुनिए और खुद को अप टू डेट कीजिए. इतना कुछ महज़ आधे घंटे के न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में नितिन ठाकुर के साथ. 

'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement