आज का दिन: भारत के कोविड टीकाकरण की कहानी, बिहार महागठबंधन में पड़ने लगी दरार

अब वैक्सिनेशन ड्राइव को शुरू हुए पूरे 10 महीने हो गए हैं और वैक्सीनेशन  के मामले में ये एक अहम मोड़ है, जब ये देखा/समझा जाए कि क्या खोया-क्या पाया.

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भारत में तेज टीकाकरण ( सांकेतिक फोटो) भारत में तेज टीकाकरण ( सांकेतिक फोटो)

अमन गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 9:19 AM IST

क़रीब दो साल होने को है, कोविड ने लाइफस्टाइल से लेकर सोशल स्ट्रक्चर तक सब कुछ बदल दिया, इसके खात्मे के लिए ना जाने कौन कौन सी दवाइयां थेरेपीज का इस्तेमाल किया गया है. कुछ ने काम किया तो कुछ ने नहीं. उम्मीद की किरण बनी वैक्सीन. एक्सपर्ट लोगों ने भी यही कहा. भारत में 16 जनवरी से वैक्सीन लगनी शुरू हुई. हमारा शुरुआती टारगेट था – आठ महीने में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाना. मतलब, करीब 13 लाख वैक्सीन रोज़. नेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक 10 फरवरी तक देश में 70 लाख लोगों को वैक्सीन लग गई थीं. अब वैक्सिनेशन ड्राइव को शुरू हुए पूरे 10 महीने हो गए हैं और वैक्सीनेशन  के मामले में ये एक अहम मोड़ है, जब ये देखा/समझा जाए कि क्या खोया-क्या पाया.

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भारत की वैक्सीन कहानी

और इसी के साथ ये आज क़रीब 1 अरब यानि 100 करोड़ वैक्सीन डोज का आंकड़ा पूरा हो जाएगा.  इस आंकड़े तक हम ऐसे ही नहीं पहुंचे हैं. कई बदलाव हुए. कई बाधाएं आई. कई विवाद हुए. राज्य और केंद्र आपस में भिड़े भी. कभी नए रिकॉर्ड बने तो कभी उस रिकॉर्ड पर राजनीति भी हुई. लेकिन अहम सवाल हमेशा यहीं आकर रुकता है कि भारत की अब तक की वैक्सिनेशन जर्नी कितनी कबील ए तारीफ़/ग़ौर है. जो हमारा दिसंबर आख़िर तक का टारगेट है क्या उसके हिसाब से ये कहना अभी सही होगा की हमने माइलस्टोन अचीव कर लिया है?  कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि इन 100 करोड़ डोजेज में डिस्पेरिटी बहुत ज्यादा है मसलन सिर्फ पहले डोज पर ज्यादा ध्यान है सरकार का, सेकेंड डोज पर कम. शहर और ग्रामीण लेवल पर वैक्सीनेशन का अंतर है, आप क्या चैलेंजेस देखते हैं?

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बिहार में महागठबंधन में दरार?

राजनीति में दोस्ती-दुश्मनी बड़ी बेमानी चीज़ है. पार्टियां कब दोस्त से दुश्मन बन जाती हैं और कब दुश्मन से दोस्त, मालूम नहीं. बिहार की राजनीति को ही देखें, राजद और कांग्रेस यहाँ लम्बे समय से साथ रहकर सामाजिक न्याय और सेक्युलरिज्म का राग अलापते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों से एक दूसरे को फूटीं आंख नहीं सुहा रहें. वजह है विधानसभा की दो सीटों पर हो रहा उपचुनाव. दरअसल, तारापुर और कुशेश्वरस्थान विधानसभा सीटों पर पहले आरजेडी ने उम्मीदवारों की घोषणा की तो उसके तुरन्त बाद कांग्रेस ने भी दोनों सीटों से अपने उम्मीदवारों को उतारने का एलान कर दिया। इसके बाद बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास आरजेडी पर बिफर पड़े। उन्होंने कहा कि भजापा से समझौते के कारण आरजेडी ने कांग्रेस का साथ छोड़ा है और उपचुनाव के बाद राजद और भाजपा हाथ मिला सकते हैं. राजद का भी पलटवार आया, कहा पार्टी ने कि कॉंग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को बिहार के राजनीति की जमीनी समझ नहीं है. ऐसे में, ये छींटाकशी क्या गुल खिलाएगी, सवाल ये कि बिहार में हाल फिलहाल के ये जो राजनीतिक घटनाक्रम या फिर बयानबाजी चल रही है क्या उससे ये मान लिया जाए कि कांग्रेस और आरजेडी में फूंट पड़ चुकी है और दोनों पार्टियों के बीच दूरियां बढ़ चुकी हैं?  अगर दोनों पार्टियों का गठबंधन टूटता है तो नए पॉलिटिकल इक्वेशन क्या होंगे बिहार के?

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फेसबुक की नई पहल 'MetaVerse'

सोशल मीडिया प्लेटफार्म के रूप में चर्चित और उपलब्ध फेसबुक ने एक नए इनीशिएटिव की घोषणा बीते महीने की थी. मार्क जकरबर्ग ने बीते महीने कहा था कि हम एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म के तौर पर तो ग्रो कर चुके हैं लेकिन अब हम एक ऐसा स्पेस बनाना चाहते हैं जहाँ लोग दूर रहते हुए भी बातचीत के नॉर्मल तरीकों से इतर भी एक दूसरे से जुड़े रह सकें और हम इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ कर 'Meta Verse' कम्पनी के रूप में आगे बढ़ने की सोच रहे हैं.  ये एलान बीते महीने ही हुआ था. अब फेसबुक की तरफ से इस इनीशिएटिव के लिए यूरोपियन कंट्रीज से दस हज़ार लोगों को हायर करने की भी बात कही गयी है. हालांकि वो हायरिंग कई चरणों मे होगी. लेकिन फिलहाल सवाल ये है कि फेसबुक की ये नई पहल  'MetaVerse' है क्या? और इसके तहत काम कैसे होने वाला है?

इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां और आज के इतिहास की अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ

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अमन गुप्ता

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