एंटीलिया मामले और मनसुख हिरेन मामले में फंसे पूर्व मुंबई कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार ने इनकार कर दिया. परमबीर ने कहा कि अनिल देशमुख के खिलाफ शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए उनके खिलाफ जांच शुरू की गयी है. परमबीर ने आगे मांग करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से की जा रही सभी जांच सीबीआई को सौंपी जाए.
परमबीर ने मामले को दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने की बात भी कही. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं वो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंका करते.
मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने परमबीर सिंह के वकील से कहा कि उनके मुवक्किल 38 साल से महाराष्ट्र में पुलिस सेवा में रहे और उन्हें राज्य की पुलिस पर ही भरोसा नहीं है. जिसके चलते मामले को राज्य से बहार भेजने की मांग की जा रही है, यह अजीब सी बात है. जानकारी के मुताबिक परमबीर के वकील महेश जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मेरे मुवक्किल को जांच अधिकारी द्वारा परेशान किया जा रहा है.
परमबीर सिंह की ओर से कहा गया कि मुझे अपने पत्र वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है. जेठमलानी ने कहा कि अगर मैं इसे वापस नहीं लूंगा तो मेरे खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और आपराधिक मामलों में फंसा दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप इस मामले की मेरिट पर बहस कीजिए और अगर तत्काल राहत चाहते हैं तो मुंबई हाईकोर्ट जाइए.
सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह को जवाब देते हुए कहा कि हमें आश्चर्य इस बात पर है कि आपने 30 साल महाराष्ट्र पुलिस में सेवा दी और अब आपको अपने ही राज्य के पुलिस पर भरोसा नहीं है. यह अजीब दलील है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम परमबीर सिंह की याचिका खारिज कर रहे हैं. सुप्रीमकोर्ट ने कहा जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं वो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंका करते. अदालत ने कहा कि हम याचिका खारिज कर रहे हैं. जिसके बाद परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली. परमबीर सिंह के वकील ने कहा कि हम अब बाम्बे हाईकोर्ट जाएंगे.
संजय शर्मा