कृष्ण जन्माष्टमी के एक दिन बाद यानी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को दही हांडी उत्सव का आयोजन किया जाता है. इस दिन मिट्टी के बर्तन में दही भरकर ऊपर रस्सी पर लटका दिया जाता है. वहीं गोविंदाओं की टोली पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकी हांडी को तोड़ते हैं. इसे विशेष तौर पर महाराष्ट्र व गुजरात में मनाया जाता है. इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 6 सितंबर को है और दही हांडी उत्सव का आयोजन 7 सितंबर को किया जाएगा.
दही हांडी के उत्सव को मनाने की तैयारी दो से तीन महीने पहले शुरू हो जाती है. हर दिन 2 से 3 घंटे तक मानव पिरामिड बनाने के लिए गोविंदाओं की टोली पसीने बहाती है. इस अभ्यास के दौरान सुरक्षा का बेहद खास ध्यान रखा जाता है. मुंबई के विलेपार्ले इलाके में सोमवार देर शाम गोविंदाओं की टोली ने मानव पिरामिड बनाने जमकर अभ्यास किया. साथ ही स्पेन से आए मेहमानों का भी गोविंदाओं ने अपने ही अंदाज में उनका स्वागत किया.
गोविंदाओं की टोलियों ने पिरामिड बनाकर किया अभ्यास
मानव पिरामिड बनाने वाले गोविंदा पथक ने बताया कि वो सभी रोज दो से तीन घंटे जमकर प्रैक्टिस करते हैं. सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है. जो सबसे ऊपर रहता है वो बाकायदा हेलमेट और अन्य सुरक्षा का सामान पहनता है. फिलहाल हम 6 से 7 लोग ही मानव पिरामिड बना रहे हैं. बता दें, दही हांडी उत्सव पर मानव पिरामिड बनाकर हांडी फोड़ने के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं. इस दिन जगह-जगह दही हांडी प्रतियोगिताएं भी होती हैं.
दही हांडी उत्सव का आयोजन 7 सितंबर को किया जाएगा
पौराणिक कथाओं के अनुसार कान्हा अपने गांव की महिलाओं से माखन और दही चुराकर सभी सखाओं को खिलाते थे. वे गुलेल से सभी की हांडियां फोड़ा करते थे. कान्हा के माखन चोरी की आदत से परेशान होकर गोपियों ने अपनी दही व माखन के बर्तन ऊंचाई पर लटकाने शुरू कर दिया. इसी के चलते हर साल दही हांडी का उत्सव मनाया जाता है.
मोहम्मद एजाज खान