मिलिंद देवड़ा के रूप में पार्टी को मिल गया दमदार नेता, सिर्फ देश ही नहीं दुनियाभर में मिलेगी शिवसेना को पहचान

शिवसेना ज्वाइन करने के ठीक दो दिन बाद देवड़ा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शिंदे का समर्थन करते नजर आएंगे. इससे पता चलता है कि शिंदे गुट को एक ऐसे नेता की जरूरत थी जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सके.

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मिलिंद देवड़ा मिलिंद देवड़ा

मुस्तफा शेख

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 7:52 PM IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने रविवार को कांग्रेस को अलविदा कह दिया. माना जा रहा है कि वो लंबे समय से एक ऐसी पार्टी की तलाश में थे, जिसे उनके कौशल की जरूरत हो. जब भी राहुल गांधी खेमे का कोई पूर्व नेता पार्टी छोड़ता है तो सोशल मीडिया पर एक तस्वीर सामने आ जाती है. मिलिंद देवड़ा भी उन्हीं नेताओं में से एक थे जो टीम राहुल के थे. वह एकमात्र ऐसे नेता नहीं हैं, जो भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं. राहुल के और भी कई करीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया, आर. पी. एन. सिंह, जितिन प्रसाद और सचिन पायलट जैसे नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है. टीम राहुल के ही एक नेता सचिन पायलट को छोड़कर अन्य सभी ने कांग्रेस छोड़ दी है.

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हालांकि कई दिनों से चर्चा थी कि देवड़ा पार्टी छोड़ देंगे. हुआ भी ऐसा ही. रविवार को वो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में शामिल हो गए. अब राजनीतिक गलियारों में ऐसा कहा जा रहा है कि शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना महाराष्ट्र की एकमात्र पार्टी है जो अंग्रेजी बोलने वाले इस नेता का ठीक से इस्तेमाल कर पाएगी. 2019 में मुकेश अंबानी द्वारा मिलिंद देवड़ा के अभियान का समर्थन करना देवड़ा परिवार का उद्योगपतियों के साथ संबंधों का गवाह है.

दावोस में बोलेंगे देवड़ा

यही वजह है कि शिवसेना ज्वाइन करने के ठीक दो दिन बाद देवड़ा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शिंदे का समर्थन करते नजर आएंगे. उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा कि देवड़ा अपने निजी खर्च पर दावोस में हैं और उनके दिवंगत पिता के कारण विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक से उनके अच्छे संबंध हैं. इससे पता चलता है कि शिंदे गुट को एक ऐसे नेता की जरूरत थी जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सके.

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राज्यसभा भेज सकती है शिवसेना

कहा जा रहा है कि देवड़ा ने एकनाथ शिंदे के बेटे सांसद श्रीकांत शिंदे के साथ मजबूत संबंध बना लिए हैं और पार्टी उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत करेगी. कहा ये भी जा रहा है कि मिलिंद देवड़ा ने राज्यसभा सांसद बनने के लिए ही अपनी पार्टी बदल ली है. बता दें कि मिलिंद देवड़ा ने 2004 और 2009 में दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट जीती. फिर 2014 और 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2019 में, उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अचानक मुंबई अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.

कांग्रेस में रहते हुए देवड़ा के लिए चुनौती यह थी कि उनकी सीट पर सांसद अरविंद सावंत का कब्जा है जो कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे समूह के साथ बने रहे. ऐसा लग रहा था कि इंडिया गठबंधन में यह सीट उद्धव गुट के खाते में जाएगी. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पिछले शुक्रवार को देवड़ा ने उनसे राहुल गांधी को समझाने का अनुरोध किया था कि दक्षिण मुंबई निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस के पास रहना चाहिए. इस पर देवड़ा से कहा गया कि वे इस बारे में राहुल गांधी को खुद समझाएं.

पहले देवड़ा के पिता लड़ते थे इसी सीट से चुनाव

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मिलिंद देवड़ा ने पहली बार 2004 में दक्षिण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. इससे पहले उनके पिता मुरली देवड़ा ने लंबे समय तक इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. वह 2004 में भारत के सबसे युवा सांसदों में से एक थे. एक सांसद रहते हुए, देवड़ा ने कई संसदीय समितियों में कार्य किया. उन्होंने रक्षा, नागरिक उड्डयन, योजना, शहरी विकास, सूचना और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया.

शिवसेना को मिला दमदार नेता

खुद को एक दूरदर्शी युवा नेता, पेशेवर और महानगरीय नेता के रूप में स्थापित करने के बावजूद, वह 2014 में मोदी लहर में अपने निर्वाचन क्षेत्र को बरकरार नहीं रख सके. मुकेश अंबानी के समर्थन के बावजूद 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. दो हार के बाद, उनके राजनीतिक करियर को बड़ा झटका लगा और वह 2019 में मुंबई कांग्रेस को पुनर्जीवित करने में भी असफल रहे. देवड़ा के अब शिंदे गुट में शामिल होने के साथ, शिंदे गुट को एक महत्वपूर्ण नेता मिल गया है जिसका दिल्ली में व्यापार और राजनीतिक हलकों में प्रभाव है.

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