बिहार विधानसभा चुनाव में शिवसेना को झटका लगा है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई में पार्टी ने बिहार चुनाव में 22 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. लेकिन इन उम्मीदवारों के प्रदर्शन का हाल यह रहा कि इनसे ज्यादा नोटा के खाते में वोट गए. बिहार चुनाव में झटका लगने पर बीजेपी नेताओं ने तंज कसे तो और सोशल मीडिया पर भी लोग कटाक्ष करने से नहीं चूके.
बिहार चुनाव में शिवसेना को 0.05 फीसदी वोट मिले जबकि NOTA पर 1.68% मतदाताओं ने बटन दबाया. बिहार में पालीगंज सीट पर शिवसेना के मनीष कुमार को मजह 44 वोट मिले. इसी तरह गया शहर सीट पर बूटी सिन्हा को 49 वोट मिले जबकि वहीं नोटा पर 159 लोगों ने बटन दबाया. बिहार में कमोबेश उन सभी सीटों का यह हाल रहा जहां शिवसेना के उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने मैदान में उतरे.
बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर हाई वोल्टेज की राजनीति के बाद शिवसेना ने बिहार चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. पार्टी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ऐलान किया था कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित पार्टी के शीर्ष नेता मसलन आदित्य ठाकरे बिहार में चुनाव प्रचार करेंगे, लेकिन उनमें से किसी ने भी चुनाव प्रचार में भाग नहीं लिया.
बिहार में खराब प्रदर्शन के बाद शिवसेना के एक पूर्व नेता ने ही तंज कसने में देर नहीं की. शिवसेना के पूर्व सांसद और महाराष्ट्र में सहयोगी पार्टी कांग्रेस के नेता संजय निरूपम ने कटाक्ष किए. संजय निरूपम ने ट्वीट किया, 'शिवसेना बिहार में 22 सीटों पर लड़ी. सुनने पर पता चला कि उसे 21 सीटों पर नोटा से भी कम वोट मिले. इसलिए उन्हें कांग्रेस को सलाह देने की बजाय अपना मुंह बंद रखना चाहिए.'
महाराष्ट्र में बीजेपी के विधायक नीतेश राणे ने बिहार चुनाव में खराब प्रदर्शन के चलते शिवसेना को निशाने पर लिया. नीतेश राणे ने कहा कि कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक के साथ क्या हुआ है..शिवसेना को धन्यवाद!
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महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने भी बिहार में शिवसेना को उसकी 'ताकत' की याद दिलाई. फडणवीस ने इंडिया टुडे से कहा, "शिवसेना को अब हमें उपदेश देना बंद कर देना चाहिए, उन्हें पहले बिहार में अपना प्रदर्शन देखना चाहिए."
एक अन्य बीजेपी नेता अतुल भातखलकर ने भी बिहार में अपने पार्टी चिन्ह पर कटाक्ष किया. भातखलकर ने शिवसेना को सोनिया-सेना कहते हुए ट्वीट किया, "शिवसेना (बिहार में) को पहले जारी किया गया चुनाव चिह्न बेहतर था. उन्होंने अपने प्रतीक 'तुतारी' (तुरही की तरह वाद्य यंत्र) को भी शर्मसार कर दिया."
कमलेश सुतार