महाराष्ट्र: इस गांव में जमीन के अंदर से आ रही रहस्यमयी आवाज, लोगों को हो रही हैरानी

महाराष्ट्र के एक गांव में रहने वाले लोग उस समय हैरान रह गए जब अचानक 6 सितंबर को जमीन के अंदर से रहस्यमयी आवाजें आने लगीं. हैरत में आकर गांव वालों ने प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दी. गांव के दौरे पर आए अधिकारी भी फिलहाल ये पता नहीं कर सके हैं कि आखिर ये आवाजें आ क्यों रही हैं?

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गांव में खेती से जुड़े काम करती महिलाएं (File Photo) गांव में खेती से जुड़े काम करती महिलाएं (File Photo)

aajtak.in

  • औरंगाबाद,
  • 14 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 11:25 AM IST

महाराष्ट्र के एक गांव में जमीन के अंदर से रहस्यमयी आवाजें आ रही हैं. इस घटना ने गांव के लोगों को हैरत में डाल दिया है. वैज्ञानिक इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें भी इस काम में सफलता नहीं मिली है.

जिस गांव में यह रहस्यमयी घटनाएं हो रही हैं, वह महाराष्ट्र के लातूर जिले में है. गांव का नाम हसोरी है, जो नीलांगा तहसील के गांव किलारी से 28 किलोमीटर दूर है. 

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बता दें कि किलारी गांव में 1993 में भीषण भूकंप आया था, जिससे 9,700 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी. गांव में जांच के लिए पहुंचे एक अधिकारी ने भी इस बात को कंफर्म किया है. 

जिला अधिकारियों ने भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान के विशेषज्ञों से घटनास्थल का अध्ययन करने के लिए गांव का दौरा करने की अपील की है. उन्होंने बताया कि इलाके में कोई भूकंप जैसी गतिविधि दर्ज नहीं की गई है.

अधिकारियों के मुताबिक ये आवाजें 6 सितंबर से सुनी जा रही हैं. ग्रामीणों की शिकायत के बाद  लातूर के जिला कलेक्टर पृथ्वीराज बी पी ने मंगलवार को गांव का दौरा किया था. उन्होंने लोगों से बिल्कुल भी न घबराने की अपील की.

दौरे के बाद अधिकारियों ने कहा कि नांदेड़ के स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का एक दल जल्द ही गांव का दौरा करने वाला है.

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इस तरह का एक मामला महाराष्ट्र में पहले भी सामने आ चुका है. फरवरी 2020 में महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के बोथी गांव में धरती के नीचे से भारी गड़गड़ाहट की आवाजें सुनी गई थीं. आवाज़ सुनकर गांव के लोग जाग गए और घर से बाहर निकल कर इधर-उधर भागने लगे थे. गांव वालों को तब हैरानी हुई थी, जब उन्होंने सुबह कहीं से भी भूकंप के झटकों जैसी कोई खबर नहीं देखी.

क्या था जमीन के नीचे गड़गड़ाहट का राज?

तेज गड़गड़ाहट की असल वजह बताते हुए वैज्ञानिक अरुण बापट ने कहा था कि बोथी और उसके आसपास का इलाका घाटी जैसा है. यहां पानी के कई स्रोत्र हैं. पानी ऊंचे स्थान से अंडाकार घाटी में आकर जमीन के नीचे एकत्र होता है. यहां जमीन की बनावट बहुत छिद्र वाली है. 

धरती के नीचे चट्टानें भी सुराखों वाली हैं. इस तरह जमीन के नीचे सोखा हुआ पानी निर्वात में छोटे-छोटे कणों के तौर पर रहता है. वहां पानी लंबे वक्त तक रहता है. लेकिन जब धरती का तापमान अचानक बढ़ता है तो निर्वात में पानी के कण वाष्पित होकर भाप के बादल जैसे बन जाते हैं. ये भाप के बादल जमीन के नीचे इधर उधर होते हैं तो भारी गड़गड़ाहट की आवाज उत्पन्न करते हैं.

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