MNS ने खेला मराठी कार्ड, कहा- नवरात्रि पर डांडिया आयोजनों का आधा मुनाफा ले BMC

एमएनएस ने नवरात्रि महोत्सवों के सभी आयोजकों को चेताया है कि अगर वो बीएमसी की जगह पर ऐसे आयोजन करते हैं तो कॉमर्शियल रेट्स के हिसाब से भुगतान करें. साथ ही ऐसे आयोजनों से होने वाले मुनाफे का आधा हिस्सा बीएमसी को दें

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एमएनसी ने पूछा- बीएमसी गणेश मंडलों से पैसा लेती है तो डांडिया आयोजकों को छूट क्यों? एमएनसी ने पूछा- बीएमसी गणेश मंडलों से पैसा लेती है तो डांडिया आयोजकों को छूट क्यों?

मयूरेश गणपतये / खुशदीप सहगल

  • मुंबई,
  • 20 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:58 PM IST

बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) के चुनाव बेशक अभी कई महीने दूर हैं लेकिन राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने मराठी कार्ड अभी से खेलना शुरू कर दिया है. इस बार इनके निशाने पर नवरात्रि महोत्सव हैं. ये महोत्सव अधिकतर गुजराती समुदाय के लोग मनाते हैं. एमएनएस ने नवरात्रि महोत्सवों के सभी आयोजकों को चेताया है कि अगर वो बीएमसी की जगह पर ऐसे आयोजन करते हैं तो कॉमर्शियल रेट्स के हिसाब से भुगतान करें. साथ ही ऐसे आयोजनों से होने वाले मुनाफे का आधा हिस्सा बीएमसी को दें.

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'डांडिया आयोजनों की आधी कमाई ले बीएमसी'
एमएनएस का कहना है कि गणेश मंडलों से गणपति महोत्सवों के आयोजन और प्रमोशन के लिए जिस तरह बीएमसी फीस लेती है, उसी तरह नवरात्रि आयोजकों से भी ली जानी चाहिए. पार्टी के पार्षद संदीप देशपांडे ने इस संबंध में बीएमसी प्रमुख को चिट्ठी लिखी है. इसमें मांग की गई है कि बीएमसी को डांडिया जैसे कॉमर्शियल आयोजनों से होने वाली कमाई के कम से कम 50 फीसदी हिस्से पर अपना दावा करना चाहिए. चिट्ठी में कहा गया है कि नवरात्रि आयोजकों महंगी टिकटों, विज्ञापनों और प्रायोजकों से मोटी कमाई करते हैं.

इस बार नवरात्रि का आयोजन 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक होना है. मुंबई में हर साल गरबा और डांडिया के लिए 500 से ज्यादा स्टाल लगाए जाते हैं. ये आयोजन अधिकतर बीएमसी की जमीन पर ही किए जाते हैं. नवरात्रि महोत्सवों के आयोजकों में अधिकतर गुजराती समुदाय के ही लोग हैं.

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'नियम सभी के लिए एक हों'
देशपांडे ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, 'अगर बीएमसी गणेश मंडलों से पैसा लेती है तो डांडिया आयोजकों को छूट क्यों? वो शहर की जगह का इस्तेमाल करते हैं, कमाई करते हैं लेकिन बीएमसी को नाममात्र का ही पैसा देते हैं. बीएमसी को अपना जायज राजस्व नहीं छोड़ना चाहिए. बीएमसी को ऐसे आयोजकों से विज्ञापन और बैनर लगाने के लिए भी फीस लेनी चाहिए.' हालांकि चिट्ठी में ये भी कहा गया है कि एमएनएस नवरात्रि महोत्सव के आयोजन के खिलाफ नहीं है. मराठी लोग भी इसमें हिस्सा लेते हैं. लेकिन नियम सब के लिए एक होने चाहिए.

मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है- बीजेपी
हालांकि बीएमसी में सत्ता में शिवसेना की भागीदार बीजेपी ने अलग राय व्यक्त की है. बीएमसी से जुड़े बीजेपी नेता मनोज कोटक ने कहा, 'बीएमसी दुर्गा पूजा और नवरात्रि के लिए जमीन देती है. एमएनएस को त्योहारों को लेकर बांटने वाला रुख नहीं अपनाना चाहिए. वो फरवरी में बीएमसी चुनाव से पहले मुद्दे का राजनीतिकरण करना चाहते हैं.'

हाल में एमएनएस कार्यकर्ताओं ने घाटकोपर के अमृत नगर में दूसरे राज्यों से आए सब्जी-फल विक्रेताओं की पिटाई कर दी थी. इस मामले में पार्टी के 5 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया गया था. 2014 में एमएनएस ने बेस्ट से अपनी 200 बसों और शेल्टर्स से गुजराती अखबार संदेश के विज्ञापन हटा लेने के लिए कहा था. इन विज्ञापनों में लिखा था- 'मुंबई की आर्थिक प्रगति और बौद्धिक विकास में किसने योगदान दिया- हम गुजरातियों ने.' इसी भाषा से नाराज होकर एमएनएस ने विज्ञापन हटाने के लिए अभियान चलाया था.

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