जीरॉक्स मशीन, कंप्यूटर का किराया 70 लाख, महाराष्ट्र विधानसभा के शीत सत्र में पैसे की बर्बादी!

पिछले वित्त वर्ष में शीत सत्र के आयोजन में जीरॉक्स मशीन, कंप्यूटरों के किराए पर ही 70 लाख रुपये खर्च हुए हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि रेलवे स्टेशन से ऑफिस तक तमाम दस्तावेज पहुंचाने पर ही 3.5 से 4 लाख रुपये खर्च हो गए.

Advertisement
महाराष्ट्र विधानसभा के शीत सत्र का आयोजन नागपुर में होता है महाराष्ट्र विधानसभा के शीत सत्र का आयोजन नागपुर में होता है

पंकज खेळकर / दिनेश अग्रहरि

  • पुणे ,
  • 15 जून 2018,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

महाराष्ट्र विधानसभा के नागपुर में शीत सत्र के आयोजन में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं. पिछले वित्त वर्ष में शीत सत्र के आयोजन में जीरॉक्स मशीन, कंप्यूटरों के किराए पर ही 70 लाख रुपये खर्च हुए हैं.

एक आरटीआई अप्लीकेशन के द्वारा यह जानकारी सामने आई है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि रेलवे स्टेशन से ऑफिस तक तमाम दस्तावेज पहुंचाने पर ही 3.5 से 4 लाख रुपये खर्च हो गए.

Advertisement

पुणे के आरटीआई एक्टिविस्ट प्रफुल्ल सारडा ने नागपुर में आयोजित विधानसभा के शीत सत्र पर हुए खर्चों के बारे में जब आरटीआई से जानकारी मांगी तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए.

प्राप्त जानकारी के अनुसार साल 2017-18 में नागपुर में शीत सत्र के आयोजन पर 1.60 करोड़ रुपये खर्च हुए. इसके पहले साल 2014-15 में इस आयोजन पर 44.22 लाख, साल 2015-16 में 1.84 करोड़ और साल 2016-17 में 1.32 करोड़ रुपये खर्च हुए.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में नागपुर में आयोजित शीत सत्र के दौरान कुल 17 मदों में पैसे खर्च किए गए. ईंधन पर 70 से 80 लाख रुपये खर्च किए गए. यही नहीं, इसके अलावा राज्य परिवहन की बसों को किराए पर लेने के लिए 25 से 30 लाख रुपये खर्च किए गए. अब यह सोचने की बात है कि आखिर कितने विधायकों ने वास्तव में बसों की सेवाएं ली होंगी.

Advertisement

टीवी के किराए पर 1 लाख रुपये खर्च

आरटीआई के अनुसार, बीएसएनएल कंप्यूटर लीज लाइन पर 2.5 से 3 लाख रुपये खर्च किए गए. यही नहीं, सबसे दिलचस्प बात यह है कि रेलवे स्टेशन से ऑफिस तक तमाम दस्तावेज पहुंचाने पर 3.5 से 4 लाख रुपये खर्च हो गए.

सत्र के दौरान, मुख्यमंत्री के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जो टीवी इस्तेमाल हुआ उसके किराए पर ही एक लाख रुपया खर्च हो गया. इस तरह 79 इंच के एक टीवी का हर दिन का किराया करीब 3 हजार रुपये पड़ा.

सारडा ने इसे जनता के धन की बर्बादी मानते हुए मुख्यमंत्री से ध्यान देने को कहा है. व इस मसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक पीआईएल भी दाखिल करने जा रहे हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement