महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना (शिंदे) को रोकने के लिए धुर विरोधी कांग्रेस से हाथ मिला लिया. अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भी ऐसा ही हुआ, जहां बीजेपी ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को साथ ले लिया. इन दोनों नगर परिषदों में गठबंधन के मसले ने जोर पकड़ा, तो अब सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इसे लेकर नाराजगी जताई है.
सीएम फडणवीस ने अकोला और अंबरनाथ, दोनों ही जगह पार्टी की लोकल यूनिट से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि यह गठबंधन तुरंत समाप्त करें. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी फैसले को नेतृतत्व ने मंजूरी नहीं दी है. सीएम फडणवीस ने इसे लेकर एक्शन की भी चेतावनी दी और कहा कि अनुशासन के लिहाज से यह गलत है और कार्रवाई होगी.
अंबरनाथ में बीजेपी-कांग्रेस के गठबंधन को शिवसेना (शिंदे) ने विश्वासघात बताया था और कहा था कि यह पीठ में छूरा घोंपने जैसा है. शिवसेना (शिंदे) के सांसद डॉक्टर श्रीकांत शिंदे ने अंबरनाथ में बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन पर कहा था कि यह सवाल हमारी मित्र बीजेपी से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि इस पर स्पष्ट और बेहतर जवाब बीजेपी के नेता ही दे सकते हैं.
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श्रीकांत शिंदे ने यह भी कहा था कि कई वर्षों से केंद्र, राज्य और महानगरपालिकाओं में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन चला आ रहा है. यह गठबंधन मजबूत बने रहना चाहिए. उन्होंने अंबरनाथ में शिवसेना के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि वहां शिवसेना की सत्ता रही है और शिवसेना ने वहां विकास के अच्छे और ठोस काम किए हैं.
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सांसद शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया था कि आगे कोई भी निर्णय लिया जाए, लेकिन शिवसेना हमेशा विकास की राजनीति में विश्वास रखती है और जो भी विकास के साथ होगा, शिवसेना उसके साथ खड़ी रहेगी.
कांग्रेस ने क्या कहा?
अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी के साथ हुए गठबंधन को लेकर कांग्रेस ने स्पष्ट कहा है कि यह बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन नहीं है. महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता सचिन सावंत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के स्थानीय नेताओं की ओर से किए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ बनाया गया मोर्चा है. इसमें कांग्रेस और बीजेपी ही नहीं, निर्दलीय भी शामिल हैं. केवल यह कहना ठीक नहीं है कि कांग्रेस और बीजेपी साथ आ गए.
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