एल्गार परिषद केस: बॉम्बे HC की नसीहत- कैदियों की मानवीय जरूरत समझे जेल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों को कैदियों की जरूरतों को समझने और मानवता दिखाने के लिए कार्यशाला का आयोजन करने की जरूरत है

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बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो) बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

विद्या

  • मुंबई,
  • 08 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

एल्गार परिषद मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि जेल अधिकारियों को कैदियों की जरूरतों को समझने और मानवता दिखाने के लिए कार्यशाला का आयोजन करने की जरूरत है. अदालत ने उदाहरण दिया कि कैसे आरोपी गौतम नवलखा का चश्मा चोरी हो गया, लेकिन जेल ने परिवार की ओर से भेजे गए चश्मे को स्वीकार नहीं किया गया.

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि ये मानवीय विचार हैं. कोर्ट आज एल्गार परिषद आरोपी रमेश गैचोर और सागर गोरखे की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. आपको बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सागर गोरखे और रमेश गैचोर को 7 सितंबर की देर रात गिरफ्तार किया था. 

गिरफ्तारी के एक महीने बाद एनआईए ने आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था.. चार्जशीट में जिन लोगों का नाम है, वह इस प्रकार हैं-  प्रोफेसर आनंद तेलतुंबडे, गौतम नवलखा, हनी बाबू, कबीर कला मंच के तीन कलाकार- सागर गोरखे, रमेश गौचोर और उनकी पत्नी ज्योति जगताप, फादर स्टेन स्वामी और मिलिंद तेलतुंबडे (आनंद तेलतुंबड़े के भाई). 

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क्या है एल्गार परिषद मामला
31 दिसंबर 2017 को महाराष्ट्र के पुणे में एल्गार परिषद की एक बैठक हुई थी. आरोप था कि इस बैठक में भड़काऊ भाषण दिए गए थे, जिसके बाद भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी और दंगों जैसी स्थिति आई थी.

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