बेटी ने आंखें खोलीं, पिता ने दुनिया छोड़ी... जन्म की किलकारी और तिरंगे में विदाई ने सबको रुला दिया

महाराष्ट्र के सातारा के आरे–दरे गांव में किस्मत ने एक ही दिन दो विपरीत तस्वीरें रच दीं. बेटी ने दुनिया में आंखें खोलीं, उसी दिन भारतीय सेना के जवान प्रमोद जाधव ने दुनिया छोड़ दी. पत्नी की डिलीवरी के लिए छुट्टी पर आए प्रमोद की सड़क हादसे में मौत हो गई. जन्म की किलकारी और तिरंगे में लिपटी विदाई ने पूरे गांव को रुला दिया.

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प्रमोद जाधव की मौत की खबर सुनकर हर कोई सन्न रह गया (Photo: Screengrab) प्रमोद जाधव की मौत की खबर सुनकर हर कोई सन्न रह गया (Photo: Screengrab)

अभिजीत करंडे

  • सातारा ,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:35 AM IST

कभी-कभी जिंदगी इंसान के सामने ऐसे दृश्य रख देती है, जिनके आगे शब्द बौने पड़ जाते हैं. आंखें नम हो जाती हैं, गला भर आता है और दिल के भीतर कुछ हमेशा के लिए टूट जाता है. महाराष्ट्र के सातारा तालुका के आरे–दरे गांव में जो हुआ, वह इंसानियत को झकझोर देने वाली सच्चाई है.

जिस घर में नवजात के आने की खुशियों की तैयारी चल रही थी, उसी घर से कुछ ही घंटों बाद पिता की अंतिम यात्रा निकली. जिस आंगन में नन्ही किलकारियों की कल्पना थी, वहां तिरंगे में लिपटी खामोशी पसरी थी. भारतीय सेना के जवान प्रमोद जाधव को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, लेकिन उस सम्मान के बीच जो दर्द था, उसने हर मौजूद व्यक्ति की आत्मा को छू लिया. प्रमोद जाधव छुट्टी पर घर आए थे. वजह बेहद निजी और भावनात्मक थी उनकी पत्नी गर्भवती थीं और जल्द ही परिवार में एक नई जिंदगी आने वाली थी. महीनों बाद घर लौटे प्रमोद के चेहरे पर सुकून था. वर्दी से बाहर वह एक पति थे, एक बेटे थे और जल्द ही पिता बनने वाले थे. लेकिन किसे पता था कि किस्मत इतनी बेरहम साबित होगी.

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एक सड़क दुर्घटना ने प्रमोद जाधव की जिंदगी छीन ली. यह खबर जैसे ही गांव पहुंची, किसी को यकीन नहीं हुआ. लेकिन जब सेना की गाड़ी गांव की ओर बढ़ी, तो हर उम्मीद टूट गई. खुशियों से भरा घर अचानक शोक में डूब गया. मां बेसुध हो गईं. पिता की आंखों के सामने अंधेरा छा गया. पत्नी, जो मां बनने वाली थीं, एक पल में विधवा हो गईं.

जब जिंदगी और मौत एक साथ टकराईं

दर्द की इंतहा तब हुई, जब प्रमोद जाधव के निधन के कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी ने अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया. एक तरफ जीवन की पहली सांस… दूसरी तरफ मौत की आखिरी खामोशी… जिस पल को सबसे खुशहाल होना था, वही पल सबसे ज्यादा पीड़ा लेकर आया. प्रमोद पिता बन चुके थे, लेकिन अपनी बेटी का चेहरा देखे बिना ही इस दुनिया से चले गए. नवजात बेटी को गोद में उठाने की ख्वाहिश, उसकी पहली मुस्कान देखने का सपना सब अधूरा रह गया.

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अंतिम दर्शन का दृश्य जिसने सबको तोड़ दिया

अंतिम संस्कार के दिन आरे–दरे गांव में ऐसा सन्नाटा था, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया. तिरंगे में लिपटा प्रमोद जाधव का पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा, तो हर आंख भर आई. सबसे हृदय विदारक दृश्य तब सामने आया, जब अस्पताल से सीधे स्ट्रेचर पर लाई गई प्रमोद की पत्नी अपने पति के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं. शरीर कमजोर था, चेहरा पीला, आंखों में थमे हुए आंसू और दिल में ऐसा दर्द, जिसे कोई शब्द बयान नहीं कर सकता. वह पति को आखिरी बार देख रही थीं, जिसके साथ उन्होंने पूरी जिंदगी के सपने बुने थे.

आठ घंटे की मासूम और पिता का तिरंगा

लेकिन जो दृश्य वहां मौजूद हर इंसान को भीतर से तोड़ गया, वह इसके बाद आया. सिर्फ आठ घंटे पहले जन्मी नवजात बच्ची को उसके पिता के अंतिम दर्शन के लिए लाया गया. नन्ही-सी देह, बंद मुट्ठियां और सामने तिरंगे में लिपटा उसका पिता. वह बच्ची नहीं जानती थी कि उसने क्या खो दिया है. लेकिन वहां मौजूद हर शख्स जानता था कि यह नुकसान कभी पूरा नहीं होगा.

सलामी के बीच सन्नाटा

भारतीय सेना की ओर से पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्रमोद जाधव को अंतिम सलामी दी गई. लेकिन उस सलामी के बीच एक ऐसा सन्नाटा था, जो बहुत कुछ कह रहा था. मां का सूना आंचल, पिता की झुकी नजरें, पत्नी का टूटा हुआ संसार और गोद में एक ऐसी बच्ची, जिसे पिता की कमी का अहसास अभी नहीं, लेकिन असर पूरी जिंदगी रहेगा.

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