CBI ने दाभोलकर की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल समुद्र की गहराई से ढूंढ निकाला!

एक संदिग्ध की ओर से दिए गए सुराग के आधार पर ठाणे खाड़ी के पास तलाशी अभियान शुरू किया गया. इस काम में दुबई स्थित एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स की मदद ली गई.

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ठाणे खाड़ी से निकाली गई पिस्तौल ठाणे खाड़ी से निकाली गई पिस्तौल

मुनीष पांडे / दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 06 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 9:47 AM IST

  • पिस्तौल को बैलेस्टिक परीक्षण के लिए भेजा गया है
  • दुबई की कंपनी के पेशेवर गोताखोरों से ली गई मदद

महाराष्ट्र और कर्नाटक के चार तर्कवादियों की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों की तलाश के तहत पेशेवर गोताखोरों को ठाणे की खाड़ी से एक पिस्तौल को ढूंढ निकालने में कामयाबी मिली है. सीबीआई, महाराष्ट्र एसआईटी और कर्नाटक पुलिस डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पनसारे, एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्याओं की जांच कर रही है.

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कई महीने तक तलाश करने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उस पिस्तौल को अरब सागर के तल से ढूंढ निकाला है जिसे पुणे में तर्कवादी डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की हत्या में संभवत: इस्तेमाल किया गया.

सूत्रों ने बताया कि मामले के एक संदिग्ध की ओर से दिए गए सुराग के आधार पर ठाणे खाड़ी के पास तलाशी अभियान शुरू किया गया. इस काम में दुबई स्थित एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स की मदद ली गई. सूत्र ने बताया, ‘ये पुष्टि करने के लिए कि दाभोलकर की हत्या में क्या इसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया, पिस्तौल को बैलिस्टिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है.

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कंपनी पर खर्च किए जा रहे हैं 7.5 करोड़ रुपये

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बता दें कि दुबई की ये कंपनी अमेरिका और इंग्लैंड में भी वहां की सरकारों को पेचीदा केसों में अपनी सेवाएं दे चुकी है. सीबीआई से जुड़े एक अधिकारी ने नाम नहीं खोलने की शर्त पर बताया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक सरकार की ओर से इस कंपनी का खर्च उठाया जा रहा है जो करीब 7.5 करोड़ रुपये है.

मई 2019 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दाभोलकर की हत्या की जांच के दौरान दावा किया था कि सनातन संस्था के वकील संजीव पुनालेकर ने हथियार को नष्ट करने में मदद की थी जिसे दाभोलकर और बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के लिए इस्तेमाल किया गया था.

सीबीआई ने पुणे कोर्ट में पुनालेकर और उसके सहयोगी विक्रम भावे को रिमांड पर देने की याचिका दाखिल करते वक्त कहा था कि शूटर शरद कलासकर जून 2018 में पुनालेकर से उसके दफ्तर में मुलाकात की थी. पहले गिरफ्तार किए जा चुके कलासकर ने दाभोलकर की हत्या में पुनालेकर का हाथ होना कबूल किया था.

सीबीआई की अर्जी में लिखा गया था- ‘संजीव पुनालेकर ने शरद कलासकर को हथियार नष्ट करने के लिए कहा था, इनमें गौरी लंकेश मर्डर में इस्तेमाल हथियार भी शामिल थे. 23 जुलाई 2018 को शरद कलासकर ने 4 देसी हथियार नष्ट कर ठाणे की खाड़ी में पुल से गिरा दिए थे.’

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20 अगस्त, 2013 को हुई थी दाभोलकर की हत्या

सीबीआई ने दावा किया कि पुनालेकर के साथी भावे ने दोनों शूटर्स- कलासकर और सचिन अधूरे की पुणे में उस जगह की रेकी करने में मदद की थी, जहां दाभोलकर को गोली मारी गई थी. दाभोलकर की हत्या 20 अगस्त, 2013 को पुणे में ओमकारेश्वर पुल पर की गई थी उस वक्त वो मॉर्निंग वॉक पर निकले हुए थे.

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पुनालेकर सनातन संस्था के अहम चेहरों में से एक रहा है और अपने संगठन के बचाव में टीवी डिबेट्स में हिस्सा लेता रहता था. सनातन संस्था के सदस्य विक्रम भावे को पहले 2008 ठाणे ब्लास्ट केस में चार्जशीट किया गया था. 2013 में वो बॉम्बे हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने पर रिहा हुआ. पुनालेकर को भावे कानूनी काम में मदद किया करता था.

हाल में पूरक चार्जशीट में सीबीआई ने केस में पहले गिरफ्तार अभियुक्त पर आतंकवाद का आरोप जोड़ा है. सीबीआई ने अभियुक्त पर आईपीसी की हत्या और आपराधिक साज़िश के अलावा गैर कानूनी गतिविधियां निवारण एक्ट (UAPA) की धारा 16 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है.

सीबीआई ने ये भी कहा कि नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पनसारे, एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं में एक कॉमन लिंक रहा है. सीबीआई के मुताबिक दाभोलकर की हत्या आतंकवाद की सोची समझी साज़िश के तहत की गई.

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