कमलनाथ सरकार की 'युवा स्वाभिमान योजना' से क्यों दूर हो रहे हैं युवा?

फरवरी 2019 में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने शहरी बेरोजगार युवाओं को 100 दिनों के रोजगार देने वाली युवा स्वाभिमान योजना का शुभारंभ किया था. योजना में शहरी बेरोजगार युवक-युवतियों को साल में 100 दिन का रोजगार, जिसमें प्रशिक्षण भी शामिल है, का लक्ष्य रखा गया था.

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युवा स्वाभिमान योजना युवा स्वाभिमान योजना

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 08 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 6:05 PM IST

  • कमलनाथ सरकार की 'युवा स्वाभिमान योजना' से अब दूर हो रहे हैं युवा
  • अस्थाई रोजगार देने के मकसद से लॉन्च की गई थी 'युवा स्वाभिमान योजना'

15 सालों के बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में आई कांग्रेस ने पिछले साल युवाओं को अस्थाई रोजगार देने के मकसद से युवा स्वाभिमान योजना लॉन्च की थी. लेकिन साल भर के भीतर ही कमलनाथ सरकार की ये बहुप्रचारित योजना दम तोड़ती नजर आ रही है.

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फरवरी 2019 में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने शहरी बेरोजगार युवाओं को 100 दिनों के रोजगार देने वाली युवा स्वाभिमान योजना का शुभारंभ किया था. योजना में शहरी बेरोजगार युवक-युवतियों को साल में 100 दिन का रोजगार, जिसमें प्रशिक्षण भी शामिल है, का लक्ष्य रखा गया था. योजना में 21 से 30 साल तक के शहरी नौजवान जिनके परिवार की सालाना आमदनी 2 लाख रुपये से कम है, उन्हें 100 दिन में 4 हजार रुपये महीने के हिसाब से कुल 12 हजार रुपये मानदेय भी मिलना तय किया गया.

योजना की शुरुआत में बड़ी संख्या में लोग इसकी तरफ आकर्षित हुए लेकिन साल भर के भीतर ही युवाओं ने इस योजना से दूरी बना ली है. आखिर बेरोजगार युवाओं के लिए देश मे अपनी तरह की ये पहली योजना अब दम तोड़ती क्यों दिख रही है? 'आजतक' ने जब राजधानी भोपाल में इसकी पड़ताल की तो पाया कि जिन युवाओं ने इस योजना में पंजीयन करवाया था, उनमें से ज्यादातर ने ट्रेनिंग ही शुरू नहीं की. युवाओं का तर्क था कि उन्हें ट्रेनिंग सेंटर या तो घरों से दूर दिए गए थे या फिर उन्हें उनकी पसंद के ट्रेड में ट्रेनिंग नहीं दी जा रही थी. इसलिए उन्होंने ट्रेनिंग लेने में रुचि नहीं दिखाई.

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युवाओं से की बात

'आजतक' ने भोपाल में ऐसे ही युवाओं से बात की और उनके ट्रेनिंग शुरू ना करने की वजह जानी. जब भोपाल के पुष्पा नगर में रहने वाली अलका से मिले तो यहां 2 कमरे के एक छोटे से मकान में रहने वाली अलका ने बताया कि उसने पिछले साल इस योजना का फॉर्म भरा था लेकिन शुरुआत के कुछ दिन नगर निगम में जाने के बाद फिर ट्रेनिंग में नहीं गयी.

अलका ने बताया, 'मैंने ट्रेनिंग इसलिए नहीं ली क्योंकि जब फॉर्म भरा था, तब कम्प्यूटर असिस्टेंट की जानकारी डाली थी लेकिन ये लोग बोले कि आपको सिलाई में करना है. जब सिलाई में जाना ही नहीं था तो क्यों करें? कम्प्यूटर से जुड़ा कुछ भी ट्रेनिंग दे देते तो कर लेते लेकिन उन्होंने सिर्फ सिलाई-कढ़ाई का बताया. जब उनको ऑफिस असिस्टेंट की ट्रेनिंग के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि युवा स्वाभिमान में सिर्फ सिलाई की ट्रेनिंग देंगे'.

युवाओं ने कराया योजना में पंजीयन

वहीं भोपाल के नीलबड़ में रहने वाले अरुण मिश्रा ने भी योजना में फॉर्म भरने के बाद ट्रेनिंग नहीं ली क्योंकि इन्होंने पढ़ाई तो इलेक्ट्रिकल से की है लेकिन बात जब ट्रेनिंग की आयी तो इन्हें सिलाई सेंटर और मोबाइल रिपेयरिंग में से किसी एक ट्रेड में ट्रेनिंग के लिए कहा गया. नतीजा अरुण ने दोनों ही छोड़ दिया.

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'आजतक' से बात करते हुए अरुण ने बताया, 'मुझे युवा स्वाभिमान योजना की जानकारी न्यूज से मिली थी. मैंने सोचा अच्छी योजना है तो इसके लिए अप्लाई करने चला गया था. मैंने इलेक्ट्रिकल से पढ़ाई की है, जब मैंने फॉर्म भरा उसके बाद मुझे बोला गया कि सिलाई सेंटर या मोबाइल रिपेयरिंग का कोर्स कराया जाएगा. वो मुझको करना नहीं था. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. इसलिए मैं वक्त बर्बाद नहीं कर सकता था. इसलिए मैंने ज्वॉइन नहीं किया. उसमें सिर्फ यही दो ट्रेड मिल रहे थे. मेरे हिसाब से स्कीम फेल है. 90 फीसदी लोगों को उनके हिसाब से काम नहीं मिला.'

युवाओं ने कराया योजना में पंजीयन

आंकड़े दे रहे गवाही

शहरी बेरोजगार युवा साल भर में ही कैसे इस योजना से दूर हो गए, इसकी तस्दीक इन आंकड़ों से भी होती है. मध्य प्रदेश के प्रमुख निकायों की स्थिति देखें तो...

- राजधानी भोपाल में 18092 युवाओं ने योजना में पंजीयन करवाया और इनमे से 527 युवाओं को अस्थायी रोजगार मिला.

- जबलपुर में 12296 युवाओं ने योजना में पंजीयन करवाया और 1316 युवाओं को अस्थाई रोजगार मिला.

- उज्जैन में 4201 युवाओं ने पंजीयन करवाया लेकिन इनमे से सिर्फ 303 युवाओं को अस्थायी रोजगार मिला.

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- ग्वालियर में कुल 9000 युवाओं ने पंजीयन कराया लेकिन सिर्फ 120 युवाओं को रोजगार मिला.

- मन्दसौर में 1556 युवाओं ने पंजीयन करवाया लेकिन इनमे से महज 313 ने अस्थाई रोजगार प्राप्त किया.

- नीमच में 503 युवाओं ने पंजीयन करवाया और 218 युवाओं ने अस्थाई रोजगार प्राप्त किया.

- वहीं बात अगर पूरे मध्यप्रदेश की करें तो यहां 4 लाख 2 हजार 448 युवाओं ने पंजीयन करवाया है तो वहीं 29252 युवाओं को अस्थायी रोजगार मिला है.

'युवाओं को लाभ हुआ लेकिन अभी भी कुछ कमियां'

आलम ये है कि महज साल भर पहले जोरशोर से शुरू की गई योजना के बारे में अब खुद कमलनाथ सरकार के मंत्री बोल रहे हैं कि योजना में कुछ कमियां हैं जिसे जल्द दूर किया जाएगा. हालांकि दावा कर रहे हैं कि देश मे अपनी तरह की ये पहली योजना है. जिसमे शहरी बेरोजगार युवाओं पर ध्यान दिया गया है.

'आजतक' से बात करते हुए मध्यप्रदेश के शहरी विकास मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा, 'ऐसा नहीं है कि इसको युवाओं ने पसंद नहीं किया. पुरे मध्यप्रदेश में कम से कम 30 हजार युवाओं को इसका लाभ मिला है. देश मे पहली बार किसी सरकार ने विशेषकर युवाओं के लिए, वो युवा जिनके परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम है, जो इनकम टैक्स नहीं देते और शहरी क्षेत्रों से हैं, ऐसे बेरोजगार युवाओं के लिए पहली बार कोई योजना बनाई है जिसमे हम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएं, उनको रोजगार और ट्रेनिंग दें. ये शुरुआत है और आगे इसे और विस्तृत रूप से लाएंगे.'

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शिवराज ने बताया 'अपमान योजना'

जब सरकार ने मान लिया कि योजना ठीक से परवान नहीं चढ़ पाई तो विपक्ष कहां पीछे रहने वाला था. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने युवा स्वाभिमान योजना को युवाओं का अपमान बताते हुए एमपी सरकार पर हमला बोला है.

'आजतक' से बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'इस सरकार ने युवाओं को भी धोखा दिया है. सम्बल जैसी योजना बन्द की. हमारी सरकार में युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार जैसी अनेक योजनाएं थीं. वो सारी योजनाएं बंद कर दी गईं और जिस योजना को युवा स्वाभिमान के नाम से शुरू किया वो स्वाभिमान नहीं नौजवानों के अपमान कर रही है. जिसमे रुचि होती है उसमें ट्रेनिंग नहीं हो रही है. ये छलने वाली, धोखा देने वाली और पीठ में छुरा घोंपने वाली सरकार है. जिसने मध्य प्रदेश के युवाओं के भविष्य को चौपट कर दिया है'.

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