भारत रक्षा मंच ने मांग की है कि असम के बाद अब मध्य प्रदेश में भी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस यानि एनआरसी बनाई जाए ताकि मध्य प्रदेश में भी अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान हो सक.
भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक सूर्यकांत केलकर ने "आजतक" से फोन पर बातचीत के दौरान कहा है कि मध्य प्रदेश में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों की संख्या लाखों में है. केलकर ने आशंका जताई है कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत अन्य बड़े शहरों मसलन इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर के अलावा छिंदवाड़ा जैसे छोटे शहरों तक अवैध रूप से बांग्लादेशियों की बसाहट हैं, जिसके चलते भारत के मूल निवासी को समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
केलकर के मुताबिक, वो संगठन के कामों के चलते शुक्रवार शाम को जबलपुर जा रहे हैं, जिसके बाद रायपुर, भुवनेश्वर और कोलकाता होते हुए 21 अगस्त को दिल्ली पहुंचेंगे. इसके बाद 26 अगस्त को वापस भोपाल लौटेंगे . मध्य प्रदेश सरकार से राज्य में एनआरसी बनाए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाएंगे.
सूर्यकांत केलकर ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के लोगों को बांग्लादेश के 5 शहरों के नाम नहीं मालूम होंगे. लेकिन बांग्लादेशी लोग भारत के अन्य राज्यों समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों में अब दिखना शुरु हो गए हैं. केलकर ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेशियों को भारत में बसाना किसी बड़ी साजिश का ही हिस्सा है. नहीं तो बांग्लादेश से आकर भारत के सूदूर कोने तक इनका बसना आसान नहीं होता. सूर्यकांत केलकर के मुताबिक, मध्य प्रदेश के शहरों में निर्माण कार्यों और दूसरे कामों के लिए मजदूरों की मांग लगातार बढ़ रही है. जहां इन्हें आसानी से खपाया जा रहा है.
फोन पर बातचीत के दौरान सूर्यकांत केलकर ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि देश के गरीबों को मिलने वाले पीडीएस पर बांग्लादेश से आए लोगों की संख्या लगातार बढ़ने पर भार पड़ रहा है. वहीं इनके भारत में बसने से शहरों में झुग्गियां भी लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा सूर्यकांत केलकर ने बताया कि व्यापारियों का लालच भी अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों की मदद कर रहा है.
केलकर के मुताबिक, बांग्लादेश से आए मजदूर यदि काम करते वक्त मारे जाते हैं तो कई बार उनके परिवार को आर्थिक मदद भी नहीं दी जाती क्य़ोकि उनके परिवार भी भारतीय नागरिकता के अभाव में इसकी शिकायत नहीं करते.
मोनिका गुप्ता / रवीश पाल सिंह