सामान ढोने वाले रिक्शे से 600 किमी दूर गांव पहुंचा मजदूर परिवार

वृंदावन अहिरवार अपने परिवार के साथ रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली गया था. उसका काम काज ठीक चल रहा था, मगर कोरोना के कारण सब थम गया. वृंदावन ने कहा कि उसके पास जो पूंजी थी उससे 40 से 45 दिन तक तो उसने किसी तरह काट दिए, मगर आगे समय काटना मुश्किल हो चला था.

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परिवार के साथ मजदूर (IANS) परिवार के साथ मजदूर (IANS)

aajtak.in

  • छतरपुर,
  • 18 मई 2020,
  • अपडेटेड 3:08 PM IST
  • दिल्ली से छतरपुर पहुंचा परिवार
  • परिवार को रिक्शे से ले गया मजदूर
  • मकान मालिक बना रहा था किराये का दबाव

कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर उठाए गए एहतियाती कदम के चलते मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया और ऐसे में वह घर वापसी कर रहे हैं. इसी क्रम में लागू किए गए लॉकडाउन के कारण कोई साधन नहीं मिलने पर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का एक मजदूर परिवार सामान ढोने वाले रिक्शे की सवारी करके अपने घर पहुंच गया है. परिवार ने लगातार पांच दिनों में 600 किलोमीटर का सफर तय किया है.

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मवइया गांव का रहने वाला वृंदावन अहिरवार अपने परिवार के साथ रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली गया था. उसका काम काज ठीक चल रहा था, मगर कोरोना के कारण सब थम गया. वृंदावन ने कहा कि उसके पास जो पूंजी थी उससे 40 से 45 दिन तक तो उसने किसी तरह काट दिए, मगर आगे समय काटना मुश्किल हो चला था.

न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने मजदूर के हवाला से लिखा है कि मकान मालिक लगातार किराया मांग रहा था या फिर मकान खाली करने को कह रहा था, जिसके बाद मकान खाली करना पड़ा. वृंदावन ने सामान ढोने वाला रिक्शा बनाया और उसी रिक्शे में पत्नी और बच्चों को लेकर गांव की ओर बढ़ गया.

वृंदावन अहिरवार ने कहा, "लगभग पांच दिनों में दिल्ली से छतरपुर तक का 600 किलोमीटर का रास्ता हमने तय किया है. दिल्ली के हालात की चर्चा करते हुए उसने कहा, "काम धंधे बंद हो गए हैं. रोजी रोटी की तलाश में वहां गया मजदूर वर्ग का हर व्यक्ति परेशान है और अपने घर को लौटना चाहता है. शुरू में लोगों को लगा कि कुछ दिनों में स्थितियां सुधर जाएंगी, मगर ऐसा नहीं हुआ. अब सभी लोग वापस घरों को लौटने के लिए प्रयास कर रहे हैं."

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वृंदावन अहिरवार की पत्नी ने कहा कि जब वे लोग मजदूरी करते थे, तो उनका जीवन सुखमय था और सब ठीक-ठाक चल रहा था, मगर कोरोना आने के बाद काम धंधे बंद हो गए. कुछ दिन तो किसी तरह कट गए मगर आगे जीवन निकालना उनके लिए मुश्किल हो चला है. इन्हीं स्थितियों में भी गांव लौट आए हैं, गांव में जमीन है खेती-बाड़ी है और वे खेती करके अपना जीवन यापन करेंगे.
 

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