MP को कब मिलेगा स्थायी विधानसभा अध्यक्ष, शर्मा 5 महीने से हैं प्रोटेम स्पीकर

मध्य प्रदेश में कोरोना संकट के चलते पिछले पांच महीने से प्रोटेम स्पीकर ही सदन की कार्यवाही और कामकाज देख रहे हैं, लेकिन अब नया अध्यक्ष चुना जाना है. पद एक है और दावेदार कई हैं. ऐसे में देखना है कि विधानसभा का स्थायी स्पीकर कौन बनता है?

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MP में पांच महीने से प्रोटेम स्पीकर हैं रामेश्वर शर्मा MP में पांच महीने से प्रोटेम स्पीकर हैं रामेश्वर शर्मा

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 19 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:09 AM IST
  • रामेश्वर शर्मा पांच महीने से प्रोटेम स्पीकर हैं
  • एमपी में कौन बनेगा नया विधानसभा अध्यक्ष
  • बीजेपी के कई नेता स्पीकर के दावेदारों में हैं

मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव के बाद राज्य में जनता को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक स्थायी सरकार तो मिल गई है, लेकिन अब इंतजार विधानसभा में एक स्थायी विधानसभा अध्यक्ष का हो रहा है. मध्य प्रदेश में कोरोना संकट के चलते पिछले पांच महीने से प्रोटेम स्पीकर ही सदन की कार्यवाही और कामकाज देख रहे हैं, लेकिन अब नया अध्यक्ष चुना जाना है. पद एक है और दावेदार कई हैं. ऐसे में देखना है कि विधानसभा का स्थायी स्पीकर कौन बनता है?

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दरअसल, मध्य प्रदेश में मार्च में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देने और बीजेपी का दामन थाम लेने के बाद कमलनाथ सरकार की सत्ता से विदाई हो गई थी. इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनी. ऐसे में कमलनाथ सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे नर्मदा प्रजापति के इस्तीफे के बाद बीजेपी के वरिष्ठ विधायक जगदीश देवड़ा प्रोटेम स्पीकर बने थे, लेकिन जुलाई में कैबिनेट में शामिल होने के लिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. 

जगदीश देवड़ा के इस्तीफे के बाद 3 जुलाई को बीजेपी नेता व विधायक रामेश्वर शर्मा प्रोटेम स्पीकर बनाए गए थे, तब से लेकर अभी तक वो ही विधानसभा का कामकाज देख रहे हैं. प्रोटेम स्पीकर रहते उन्होंने कांग्रेस के 4 विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए. बड़ा मलहरा से प्रद्युमन लोधी, नेपानगर से सुमित्रा देवी, मंधाता से नारायण पटेल और दमोह से राहुल सिंह ने रामेश्वर शर्मा को इस्तीफा सौंपकर बाद में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी. 

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रामेश्वर शर्मा के नाम के साथ एक अनोखा रिकॉर्ड जुड़ गया है. किसी भी विधानसभा में सबसे लंबे समय तक प्रोटेम स्पीकर बने रहने का रिकॉर्ड अब रामेश्वर शर्मा के नाम पर हो गया है. हालांकि, अब पांच महीने के बाद परमानेंट विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने की संभावना तेज हो गई है, क्योंकि उपचुनाव हो चुके हैं और कोरोना की रफ्तार भी प्रदेश में धीमी पड़ गई है. 

मध्य प्रदेश में अब बीजेपी 126 विधायकों के साथ सदन में सबसे बड़ी पार्टी है. ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही सदन को एक स्थायी विधानसभा अध्यक्ष भी मिल सकेगा. देखना अब यह है कि रामेश्वर शर्मा के बाद विधानसभा के स्थायी अध्यक्ष पद के लिए बीजेपी किसके नाम का ऐलान करती है.

कई बीजेपी नेता इस कुर्सी के कतार में शामिल हैं. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए बिसाहूलाल सिंह ने चुनाव जीतने के बाद कहा था कि विंध्य से ही विधानसभा अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए. इस मांग पर जबलपुर के दिग्गज नेता और पार्टी विधायक अजय विश्नोई ने कहा था कि मैं तो काफी पहले से विंध्य इलाके से विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने की मांग करता रहा हूं. 


 

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