भोपाल में राहुल का रोड शो, 25 में से सिर्फ 5 सीटें कांग्रेस के पास

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को भोपाल दौरे पर पहुंचे हैं. भोपाल संभाग में कुल 25 विधानसभा सीटें है, इनमें से कांग्रेस के पास महज 5 सीटे हैं. जबकि बीजेपी के पास 19 सीटें हैं.

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कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 2:20 PM IST

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक दिवसीय दौरे पर सोमवार को भोपाल पहुंचे. राहुल गांधी ने हवाईअड्डे से भेल के दशहरा मैदान तक करीब 13 किमी. का रोड शो किया. दो महीने के बाद मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस अध्यक्ष का दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

भोपाल संभाग में 25 सीटें

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार राहुल गांधी भोपाल पहुंचे हैं. भोपाल संभाग में भोपाल, राजगढ़, सीहोर, विदिशा और रायसेन जिले की 25 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें से बीजेपी के पास 19 और कांग्रेस के पास 5 सीटें हैं. जबकि एक सीट पर निर्दलीय विधायक सुदेश राय का कब्जा है.

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इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

भोपाल संभाग बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. राज्य के गृहमंत्री बाबूलाल गौर और कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्वमुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इसी इलाके से आते हैं. इतना ही नहीं विदिशा सीट से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. विदिशा से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज लोकसभा सदस्य हैं.

बीजेपी से पहले भोपाल संभाग कांग्रेस का मजबूत दुर्ग माना जाता था. दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस के आगे कमल कभी खिल नहीं सका था. 15 साल पहले जब बीजेपी उमा भारती को आगे करके चुनावी मैदान में उतरी थी तो कांग्रेस का सियासी रंग फीका पड़ने लगा.

भोपाल

भोपाल जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं. इनमें से 6 सीटें बीजेपी के पास हैं और महज एक सीट कांग्रेस के पास है. भोपाल उत्तर सीट से आरिफ अकील पांच बार से विधायक हैं. कांग्रेस अकील के जरिए ही मुस्लिम मतों को साधने की कवायद कर रही है, क्योंकि भोपाल के अलावा अन्य मुस्लिम इलाकों में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है.

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वहीं, बीजेपी के ओबीसी चेहरा और यादव समुदाय से आने वाले बाबूलाल गौर भोपाल की गोविंदपुरा सीट से विधायक हैं. वे सात बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं. वे मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.

राजगढ़

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के प्रभाव क्षेत्र जिला राजगढ़ भोपाल संभाग में आता है.  राजगढ़ में कुल पांच विधानसभा सीटें है, जिनमें से चार बीजेपी के पास है और एक सीट कांग्रेस के पास है. कांग्रेस की ओर से पिछले चुनाव में दिग्विजय के पुत्र जयवर्धन सिंह चुनाव जीतने में सफल रहे थे. इस बार का राजनीतिक माहौल बदला हुआ है कांग्रेस महासचिव लगातार प्रदेश में डेरा जमाए हुए हैं.

विदिशा

विदिशा जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं. इनमें से तीन बीजेपी के पास और दो कांग्रेस के पास है. भोपाल संभाग से विदिशा ऐसा जिला है जहां कांग्रेस को दो सीटें मिली है. जबकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इसी क्षेत्र से लोकसभा सदस्य चुनी गई हैं. इस बार बीजेपी जहां सभी सीटों पर काबिज होने की कोशिश में जुटी है. वहीं, कांग्रेस दो को चार में बदलने की जद्दोजहद कर रही.

रायसेन

भोपाल संभाग के तहत आने वाला रायसेन जिला बीजेपी का सबसे मजबूत क्षेत्र माना जाता है. इस जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं और चारों पर बीजेपी का कब्जा है. कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था.

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सीहोर

सीहोर जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं. इनमें से दो सीटें बीजेपी के पास है और एक कांग्रेस के पास. जबकि एक सीट पर सुदेश राय ने निर्दलीय रूप में जीत दर्ज की है. दिलचस्प बात ये है कि सीहोर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विधायक रह चुके हैं.

दरअसल, मध्यप्रदेश में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. 2003 से बीजेपी की सरकार है. जबकि इससे पहले 10 साल कांग्रेस ने राज किया था. 2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 165 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. कांग्रेस 58 सीटों तक सिमट गई थी. जबकि बसपा ने 4 और अन्य ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी.

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