योग पर सऊदी सरकार का फैसला स्वागत योग्य: राफिया

योग की वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर आई रांची की योग प्रशिक्षक राफिया नाज ने योग पर सऊदी सरकार के फैसले की सराहना की है. पढ़ें खबर...

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राफिया नाज राफिया नाज

धरमबीर सिन्हा

  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

योग की वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर आई रांची की योग प्रशिक्षक राफिया नाज ने योग पर सऊदी सरकार के फैसले की सराहना की है. राफिया के मुताबिक योगा को किसी धर्म, जाति या राजनीती से जोड़ना गलत है. इससे शरीर को सेहतमंद रखने में सहायता मिलती है. सऊदी अरब सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है. गौरतलब है कि सऊदी सरकार ने योग को खेल की एक विधा के तौर पर मान्यता दी है .

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मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर है राफिया

एक मुस्लिम होकर योग की शिक्षा देने की बात की वजह से राफिया इलाके के कुछ कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं. राफिया को पहली बार 21 जून 2015 को फेसबुक पर धमकी दी गई थी. इसके बाद फिर नवंबर 2016 को किसी ने फेसबुक पर ही धमकाया कि मुल्ला-मौलवी पीछे पड़ जाएंगे और फतवा दे देंगे. कॉलेज से घर जाने के दौरान भी राफिया को बाइक पर सवार दो लड़कों ने धमकी दी थी, जिसके बाद उसके घर पर पत्थरबाजी भी की गई.

मारवाड़ी कॉलेज पढ़ाई करती हैं राफिया

राफिया के मुताबिक योग से तन और मन की दुर्बलता दूर होती है. राफिया चार साल की उम्र से योग का प्रशिक्षण ले रही हैं. वह अनाथ और आस-पास के बच्चों को योगा भी सिखाती हैं. राफिया आजसू पार्टी की टिकट पर दिसंबर 2016 में मारवाड़ी कॉलेज में महासचिव के तौर पर चुनी गई थीं. बाद में पार्टी ने उसे स्टूडेंट यूनियन का स्टेट सेक्रेटरी बना दिया.

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सऊदी में बड़े बदलाव की पहल

इस्लाम धर्म को लेकर कट्टरपंथी रुख के लिए जाने जाने वाला सऊदी अरब इन दिनों बड़े बदलाव से गुजर रहा है. इससे पहले 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सऊदी अरब के विभिन्न भारतीय स्कूलों में योग सत्र का आयोजन किया गया था.

पिछले दिनों सऊदी के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज के बेटे और क्राउंस प्रिंस (वली अहद) मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले दिनों सऊदी अरब को 'उदारवादी इस्लाम' की तरफ ले जाने का वादा किया था. इसी सिलसिले में वहां महिलाओं के कार चलाने पर प्रतिबंध भी हटा लिया गया.

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