अमूमन किसी भी प्रदेश के विकास दर का अनुमान उसके प्रति व्यक्ति आय को देखकर लगाया जाता है क्योंकि विकास दर का सीधा असर प्रति व्यक्ति आय पर पड़ता है. अगर इसी पैमाने पर देखें तो झारखंड को वर्तमान विकास दर से प्रति व्यक्ति आय के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में और 17 साल लगेंगे. यह अनुमान राज्य विकास परिषद ने राष्ट्रीय व राज्य की आमदनी और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों का विश्लेषण कर निकला है.
गठन के समय काफी कमजोर स्थिति में था झारखंड
राज्य विकास परिषद ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख करते हुए कहा है कि साल 2000 में अपने गठन के समय आर्थिक आधार पर झारखंड एक बीमारू राज्य की श्रेणी में था. रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2000-01 में देश की कुल आमदनी 1972606 करोड़ में राज्य का हिस्सा सिर्फ 33043 करोड़ यानी 1.6 प्रतिशत ही था. उस वक्त प्रति व्यक्ति आय का राष्ट्रीय औसत 16,764 रुपये था जबकि झारखंड में यह 10,451 रुपये था.
तरक्की के बावजूद तय करना है लंबा सफर
हालांकि ड्राफ्ट रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि साल 2001 के बाद स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 में देश की आमदनी में राज्य का हिस्सा बढ़ कर 1.84 प्रतिशत हो गया. वित्तीय वर्ष 2001-02 से 2004-05 की अवधि में राज्य में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर 6.69 प्रतिशत दर्ज की गई. इस दौरान प्रति व्यक्ति आय के राष्ट्रीय औसत में 4.58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. साल 2012-2016 के बीच राज्य में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर 7.15 रही. वहीं राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय में 5.11 प्रतिशत वृद्धि दर दर्ज की गई. साल 2012-16 के बीच राष्ट्रीय आमदनी में 6.76 प्रतिशत की वृद्धि दर और राज्य की आमदनी में 8.59 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई. इसके बाद भी झारखंड को प्रति व्यक्ति आय से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना है.
धरमबीर सिन्हा / सुरभि गुप्ता