जम्मू-कश्मीर में 26 लाख नए वोटर, बाहर से आकर रह रहे लोग भी डाल सकेंगे वोट

अब जम्मू कश्मीर विधान सभा चुनाव में करीब 26 लाख से ज्यादा मतदाता पहली बार जुड़ेंगे. नए नियमों के मुताबिक इस बार नवंबर में मतदाता सूची का फाइनल प्रारूप प्रकाशित होना है. इसमें सेना के जवानों और अधिकारियों के जीवन साथी को सर्विस वोट का अधिकार होगा. पहली बार लद्दाख संभाग का विधान सभा में हिस्सा नहीं होगा.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST
  • 26 लाख से ज्यादा मतदाता पहली बार जुड़ेंगे
  • मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा होगी

जम्मू कश्मीर विधान सभा चुनाव कई मायनों में अनूठे होने वाले हैं. मसलन पहली बार लद्दाख संभाग का विधान सभा में हिस्सा नहीं होगा, लेकिन इसके बावजूद अब तक की सबसे ज्यादा सीटों वाला सदन होगा. अब जम्मू कश्मीर विधान सभा चुनाव में करीब 26 लाख से ज्यादा मतदाता पहली बार जुड़ेंगे. मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा होगी. दशकों से यहां रहने के बावजूद 'बाहरी' माने जाने वाले लोग भी अब बाकायदा वोटर बनकर घरेलू हो जाएंगे.
 
पहली बार उन वर्ग के लोगों को वोट देने का अधिकार मिलेगा जो आधी सदी से ज्यादा समय से जम्मू कश्मीर में समाज का हिस्सा तो हैं लेकिन सरकार का नहीं. यानी लाखों दलित वर्ग के लोग जिनको दूसरे राज्यों से लाकर बसाया तो गया था लेकिन अनुच्छेद 370 और 35a की आड़ लेकर कभी मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश राज्य के किसी राजनीतिक या सामाजिक संगठन ने नहीं की.
 
नए नियमों के मुताबिक इस बार नवंबर में मतदाता सूची का फाइनल प्रारूप प्रकाशित होना है. इसमें सेना के जवानों और अधिकारियों के जीवन साथी को सर्विस वोट का अधिकार होगा. पहले सिर्फ पुरुष सैनिकों के लिए उनकी पत्नी को पोस्टल बैलेट का अधिकार था. लेकिन अब सेना के किसी भी विंग में कार्यरत महिला कर्मचारी सैनिक के पति को भी यही अधिकार होगा. यानी लैंगिक मतभेद खत्म होकर व्यवस्था जेंडर न्यूट्रल हो गई है.
 
इसके अलावा नई व्यवस्था के तहत 17 साल की उम्र पार कर चुके युवा पेशगी ही अपना मतदाता रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके बाद अठारहवें जन्मदिन के साथ ही वो ऑटोमेटिक वोटर लिस्ट में शामिल हो जाएंगे. इसके अलावा अब 18 साल या इससे ज्यादा आयु का कोई भी युवा साल में चार बार होने वाले वोटर लिस्ट अपडेट में शामिल हो सकता है. उसे साल भर इंतजार नहीं करना होगा.
 
इसके अलावा कोई भी सरकारी या निजी कर्मचारी जो जम्मू कश्मीर में रह रहा है वो वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का अधिकारी है. पहले किसी और राज्य में रहने वाले ऐसे लोग जो जम्मू कश्मीर में रहने आ गए हैं वो भी पिछली जगह का वोटर आईडी सरेंडर कर जम्मू कश्मीर में अपना वोटर कार्ड बनवा सकेगा.  कहने का लब्बो लुआब ये कि जम्मू कश्मीर भी देश की मुख्य धारा में शामिल हो चुका है. सामाजिक, राजनैतिक और विकास के नजरिए से भी. 

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जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिरदेश कुमार के मुताबिक नई व्यवस्था और नियमों के तहत दूसरे राज्य के जो लोग यहां प्रवास कर रहे हैं, वो अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवाकर वोट डाल सकते हैं. इसके लिए अब उन्हें मूल निवासी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है. इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षाबलों के जवान भी वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करा सकते हैं.
 
जो भी 1 अक्टूबर 2022 तक 18 साल का हो जाएगा, वो अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकता है. फाइनल वोटर लिस्ट 25 नवंबर को जारी होगी. जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 1 जनवरी 2019 को वोटर लिस्ट आई थी.
 

 

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