हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार इन दिनों फंड की कमी की समस्या से जूझ रही है. इसी बीच प्रदेश सरकार ने रक्षा कर्मियों को होटलों में मिलने वाली छूट वापस ले ली है. एक आदेश के मुताबिक हिमाचल प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को भारतीय सुरक्षा कर्मियों, हिमाचल प्रदेश के मूल निवासी भूतपूर्व सैनिकों को राज्य सरकार के स्वामित्व वाले होटलों में मिलने वाले डिस्काउंट को वापस लेने का ऐलान किया.
हिमाचल सरकार ने अपने आदेश में कहा कि रक्षा कार्मिकों (सेना, नौसेना, वायु सेना) के अधिकारियों के साथ ही पूर्व सैनिकों को होटलों में रूम्स के किराए और खाने पर डिस्काउंट की अनुमति दी गई थी. लेकिन वर्तमान वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए एचपीटीडीसी के होटलों में ठहरने की सुविधा को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाता है.
हिमाचल प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थित के चलते राज्य के 2 लाख कर्मचारियों और 1.5 लाख पेंशनर्स को 1 तारीख को सैलरी और पेंशन नहीं मिल पाई थी. हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में लगभग 94 हजार करोड़ रुपये का भारी कर्ज है.
इस वित्तीय बोझ ने राज्य की वित्तीय स्थिति को अत्यधिक कमजोर कर दिया है, जिसके कारण राज्य सरकार को पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं. कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां बकाया हैं. इस राशि का भुगतान न कर पाने की स्थिति में सरकार को भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
हिमाचल प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार ने बीते दिनों बड़ा फैसला लिया था. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया था कि मुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य संसदीय सचिव, बोर्ड निगमों के चेयरमैन दो महीने तक वेतन-भत्ता नहीं लेंगे. इतना ही नहीं, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से भी वेतन-भत्ता दो महीने के लिए छोड़ने की मांग रखी थी.
मनजीत सहगल