उधार के मैट्स पर जिम्नास्टिक की ट्रेनिंग, मौसम बदल गए पर खिड़कियों से टूटे शीशे नहीं

रोहतक में स्टेडियम और ट्रेनिंग सेंटर देखकर देश की खेल व्यवस्था का अंदाजा सहज ही लग जाता है. खेलों में राजनीति और राजनीति में खेल का घालमेल भी समझ में आता है और ये भी कि नौनिहाल तो अपने ही बूते पर खेलते हैं और मेडल जीतते हैं.

Advertisement
बुनियादी अभाव में प्रैक्टिस को मजबूर खिलाड़ी बुनियादी अभाव में प्रैक्टिस को मजबूर खिलाड़ी

अमित कुमार दुबे / संजय शर्मा

  • रोहतक,
  • 20 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 11:00 PM IST

रोहतक में स्टेडियम और ट्रेनिंग सेंटर देखकर देश की खेल व्यवस्था का अंदाजा सहज ही लग जाता है. खेलों में राजनीति और राजनीति में खेल का घालमेल भी समझ में आता है और ये भी कि नौनिहाल तो अपने ही बूते पर खेलते हैं और मेडल जीतते हैं.

रोहतक स्टेडियम में सुविधाओं का अभाव
खेल की नीति बनाने वाले बड़े-बड़े स्पोर्ट्स एसोसिएशन के चेयरमैन, डायरेक्टर की पद पर नेता काबिज हो जाते हैं और AC में बैठकर फैसले लेते हैं, जबकि खिलाड़ी ऊमस में प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं. खिलाड़ियों की अधिक ऊर्जा तो मौसम से लड़ने में ही खर्च हो जाती है, प्रतिद्वंद्वी तो बाद में सामने आता है. संघर्ष की राह में न तो सरकार और ना ही समाज साथ देती है. लेकिन जब तमगे मिलते हैं तब ढोल सरकार अपना बजवाती है और समाज लड्डू बांटता है. सरकारें जीतने पर ही लाखों करोड़ों खर्च कर वाहवाही लूटती है, लेकिन संघर्ष कर रहे खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने के नाम पर आना-कानी होती है.

Advertisement

कुश्ती वालों से मैट्स मांगकर जिम्नास्टिक ट्रेनिंग
रोहतक के सर छोटूराम स्टेडियम के जिम्नास्टिक ट्रेनिंग उधार के मैट्स पर चल रही है. कुश्ती वालों से मैट्स उधार मांगकर उसपर प्रैक्टिस कर रहे हैं. जी जान से प्रैक्टिस में जुटी लड़कियां और उनकी कोच से सुविधाओं की बाबत पूछा गया तो उनके चेहरे ने ही सबकुछ कह दिया. उन्होंने एक सुर में कहा कि सुविधाएं हों तो हमारा 100 फीसदी एफर्ट और निखरेगा, स्टैमिना सही दिशा में जाएगा. अभी तो अभाव का निदान करने में ही ऊर्जा खर्च हो जाती है.

जूडो खिलाड़ी अभाव के मारे
जूडो के सेंटर में 50 खिलाड़ियों की क्षमता वाले हॉल में 75 से ज्यादा बच्चे प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं. खिड़कियों के शीशे न जाने कब से टूटे पड़े हैं. सर्दी बरसात यों ही मुंह चिढ़ा कर निकल जाते हैं. न सरकार सुध लेती है ना ही एसोसिएशन, सबको केवल मेडल जीतने का इंतजार है. साक्षी की ट्रेनिंग के दौरान न तो सरकार को खिलाड़ियों की सुविधा की सुध थी न DTC को और न ही रेलवे को. ये तो जज्बे से ओलंपिक मेडल जीत लाई. पीवी सिंधू हो या साक्षी राखी तो पदक वाली देश की कलाई पर बांध दी. लेकिन कई खिलाड़ियों को अभी भी मदद का इंतजार है ताकि वो देश का नाम ऊंचा कर सके.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement