हरियाणा के जाटलैंड में अपनी सियासी जड़े मजबूत करने के लिए बीजेपी ने ओपी धनखड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जाट कार्ड चल दिया है. राज्य में लगातार दूसरी बार पार्टी ने जाट नेता को संगठन की कमान सौंपी है. इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष की कमान सुभाष बराला के पास थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में वो अपने जाट समुदाय का दिल जीतने में कामयाब नहीं रहे थे.
बता दें कि हरियाणा में जाटों की नाराजगी के चलते बीजेपी को 2019 के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त नुकसान हुआ है. इसका नतीजा यह रहा कि बीजेपी अपने दम पर बहुमत नहीं जुटा सकी थी और उसे जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ी है. इतना ही नहीं बीजेपी के तमाम जाट नेता चुनाव हार गए थे. वहीं, कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे जाट नेता के पास पार्टी की कमान है.
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बीजेपी ने ओपी धनखड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करने का दांव चला है. हालांकि, पहले केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर प्रदेश अध्यक्ष बनने की रेस में आगे चल रहे थे, मगर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ओपी धनखड़ के नाम पर मुहर लगाई और देखना है कि वो जाट को साधने में कितना सफल रहते हैं.
हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ की बात करें तो वह खांटी संघ पृष्ठिभूमि से आते हैं. वह मनोहर लाल खट्टर की पिछली सरकार में कृषि मंत्री रह चुके हैं. हालांकि, मंत्री रहते 2019 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं. ओपी धनखड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं. प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आयरन कलेक्शन कॉरपोरेशन के वह नेशनल कोआर्डिनेटर रह चुके हैं.
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हरियाणा के झज्जर जिले के निवासी ओपी धनखड़ का जन्म 1961 में हुआ था और उनके पिता का नाम वेद मोहब्बत सिंह है. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे 11 साल तक भूगोल के लेक्चरर के तौर पर भिवानी में पढ़ाते रहे. शिक्षक के तौर पर कार्य करते हुए वह 1978 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ जुड़े और समाज सेवा व युवाओं से जुड़े सामाजिक कार्यों में लग गए.
ओम प्रकाश धनखड़ 18 साल तक संघ और उससे जुड़े संगठनों के साथ काम कर चुके हैं. वह 1980 से 1996 के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे. स्वदेशी जागरण मंच से भी जुड़ाव रहा. फिर 1996 में संघ ने उन्हें बीजेपी में भेजा. बीजेपी संगठन का वह हिमाचल प्रदेश में भी दायित्व देख चुके हैं.
माना जाता है कि इसी दौरान संगठन में काम करने के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जान-पहचान हुई थी. 2014 में पार्टी ने उन्हें रोहतक सीट से लोकसभा का टिकट देकर मैदान में उतारा था मगर वह चुनाव हार गए थे. फिर 2014 के विधानसभा चुनाव में बादली सीट से विधायक बने. जिसके बाद मनोहर लाल खट्टर की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री बने.
हालांकि, मंत्री रहते हुए 2019 का विधानसभा चुनाव वह हार गए थे. अब पार्टी ने उन्हें प्रदेश संगठन की कमान सौंपी है. वह कृषि मामलों के जानकार माने जाते हैं. इसी वजह से उन्हें पिछली सरकार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कृषि मंत्री बनाया था. बीजेपी के किसान मोर्चा के वह 2011-2013 और 2013-2015 के बीच लगातार दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं.
कुबूल अहमद