नरोदा पाटिया दंगा: बाबू बजरंगी की मौत तक जेल की सजा 21 साल में बदली

2002 के नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में गुजरात हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. हाईकोर्ट ने इस केस में बीजेपी विधायक माया कोडनानी को निर्दोष करार दिया है. जबकि बाबू बजरंगी को दोषी करार दिया है. विशेष अदालत ने बाबू बजरंगी को मौत तक जेल में रहने  की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे घटाकर 21 साल की सजा कर दी है.

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माया कोडनानी (फाइल) माया कोडनानी (फाइल)

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 12:29 PM IST

2002 के नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में गुजरात हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. हाईकोर्ट ने इस केस में बीजेपी विधायक माया कोडनानी को निर्दोष करार दिया है. जबकि बाबू बजरंगी को दोषी करार दिया है. विशेष अदालत ने बाबू बजरंगी को मौत तक जेल में रहने  की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे घटाकर 21 साल की सजा कर दी है.

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जबकि माया कोडनानी को राहत मिली है. विशेष अदालत ने कोडनानी को 28 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी. सात अन्य को 21 साल के आजीवन कारावास और शेष अन्य को 14 साल के साधारण आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था. जहां दोषियों ने निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, वहीं विशेष जांच दल ने 29 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.

कुछ ऐसा रहा था मंजर...

16 साल पहले 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था. 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगियां जलाने की घटना के बाद अगले रोज जब गुजरात में दंगे की लपटें उठीं तो नरोदा पाटिया सबसे बुरी तरह जला था. आपको बता दें कि नरोदा पाटिया में हुए दंगे में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी. इसमें 33 लोग जख्मी भी हुए थे.

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नरोदा पाटिया नरसंहार को जहां गुजरात दंगे के दौरान हुआ सबसे भीषण नरसंहार बताया जाता है, वहीं ये सबसे विवादास्पद केस भी है. ये गुजरात दंगों से जुड़े नौ मामलों में एक है, जिनकी जांच SIT ने की थी.

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