2005 में सीरियल बम धमाकों में अपनों को खोने वाले या फिर खुद घायल होने वाले लोगों के लिए 15 साल बीतने के बाद भी उनके जख़्म उतने ही हरे है जितने 15 साल पहले थे. क्या हुआ था 15 साल पहले? इन 15 सालों में पीड़ितों की जिंदगी में क्या बदलाव आए? ये जानने के लिए आजतक संवाददाता पूनम शर्मा ने बम ब्लास्ट के पीड़ितों से बातचीत की, जिसमें उस हादसे में पीड़ितों के परिजनों ने अपना दर्द बयां किया.