22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लगभग 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिन आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों के साथ खूनी खेल खेला था, वे अब भी सुरक्षाबलों की पहुंच से बाहर हैं. इस पूरे मामले में तमाम सुरक्षाबल लगातार घने जंगलों और अलग-अलग इलाकों में ऑपरेशन चला रहे हैं, फिर भी ये आतंकवादी पकड़ में नहीं आ पाए हैं.
ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इन आतंकवादियों की मदद घने जंगलों में सक्रिय ओवरग्राउंड वर्कर, प्राकृतिक गुफाएं, और दुर्गम इलाके कर रहे हैं? एनआईए की टीम भी इस वक्त पहलगाम की बैसरन घाटी में कैंप कर रही है. आज एनआईए डीजी सदानंद दाते भी ग्राउंड ज़ीरो का जायज़ा ले रहे हैं. चप्पे-चप्पे की तलाशी और जांच जारी है, फिर भी आतंकी सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर हैं.
NIA ने कई OGW से की पूछताछ
एनआईए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने अब तक लगभग 100 लोगों से पूछताछ की है. इनमें से 15 लोगों को चिन्हित किया गया है जो एनआईए के रडार पर हैं. इनसे कई बार पूछताछ की जा चुकी है. साथ ही, सुरक्षाबलों की टीम अलग-अलग इलाकों में आतंकियों के मददगार ओवरग्राउंड वर्करों पर छापेमारी भी कर रही है, जिससे फरार आतंकियों का सुराग मिल सके.
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यही वजह है कि पहलगाम आतंकी हमले में अलगाववादी संगठनों के समर्थकों पर भी एनआईए का शक गहराया है. जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत के कई गुटों और जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. एनआईए सूत्रों के अनुसार, इन छापों में बड़ी संख्या में देशविरोधी सामग्री बरामद हुई है, जो संकेत देती है कि प्रतिबंधित होने के बावजूद इन संगठनों ने पहलगाम हमले के लिए ओवरग्राउंड नेटवर्क तैयार किया था. कुपवाड़ा, हंदवाड़ा, अनंतनाग, त्राल, पुलवामा, सोपोर, बारामूला, बांदीपोरा में इनसे जुड़े करीब 100 ठिकानों पर छापे मारे गए और उनके कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. एनआईए को पुख्ता सबूत मिले हैं कि इन संगठनों के कुछ लोग ओवरग्राउंड वर्करों से लगातार संपर्क में थे.
घने जंगल और प्राकृतिक गुफाएं आतंकियों को दे रहीं शरण?
अनंतनाग जिले में कई ऐसे दुर्गम इलाके हैं, जहां आतंकियों को छिपने की जगह मिल रही है. पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित प्राकृतिक गुफाएं इनका मुख्य ठिकाना बनी हुई हैं, जहां वे 10 दिन से छिपे हुए हैं. खुफिया एजेंसियों के अनुसार, ये आतंकी पाकिस्तान से ट्रेंड होकर आए हैं और उनके पास एक से डेढ़ सप्ताह तक का राशन-पानी भी है, जिससे वे लंबे समय तक इन जगहों में टिके रह सकते हैं.
आतंकी दक्षिण पीर पंजाल क्षेत्र की प्राकृतिक गुफाओं और घने जंगलों में हाइडआउट बनाकर छिपे हुए हैं. कई बार जब सुरक्षा बल इन क्षेत्रों में मूवमेंट करते हैं, तो आतंकवादी हमला कर देते हैं. आशंका है कि पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकी भी इन्हीं जंगलों में कहीं छिपे हैं. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां फोलिएज पेनिट्रेटिंग रडार जैसे टेक्निकल उपकरणों की मदद से तलाश कर रही हैं, फिर भी अब तक कोई सफलता नहीं मिली है.
NIA जांच में क्या मिला?
एनआईए सूत्रों के मुताबिक, किसी ओवरग्राउंड वर्कर या आतंकी के अंदरूनी सूत्र ने बैसरन पर हमला करने के लिए आतंकियों को लोकेशन दी और एग्जिट प्लान में मदद की. दो बार अल्ट्रा स्टेट सिग्नल मिले, जिससे मोबाइल बिना सिम कार्ड के कनेक्ट होकर ऑडियो, वीडियो कॉल या SMS किया गया. उस स्थान की भी छानबीन की जा चुकी है.
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एजेंसियां बैकलॉग डेटा, कॉल डिटेल और बैंक अकाउंट भी जांच रही हैं. शुरुआती इन्वेस्टिगेशन का दायरा 10-12 किलोमीटर था, जिसे अब काफी बढ़ा दिया गया है, ताकि फरार आतंकियों या उनके मददगारों को पकड़ा या मार गिराया जा सके.
OGW को रिक्रूट करने वाले मास्टरमाइंड की पहचान
एनआईए सूत्रों के अनुसार, पहलगाम हमले में आतंकी फारुख अहमद का नाम सामने आया है, जिसने ओवरग्राउंड वर्करों का नेटवर्क तैयार किया. फारुख लश्कर का टॉप कमांडर है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में छिपा है. पिछले दो वर्षों में फारुख के नेटवर्क ने कई हमलों को अंजाम दिया, जिनमें पहलगाम हमला प्रमुख है.
फारुख पाकिस्तान के तीन सेक्टरों से घुसपैठ कराता है और उसे घाटी के पहाड़ी रास्तों की गहरी जानकारी है. कुपवाड़ा निवासी इस आतंकी का घर हाल ही में सुरक्षाबलों ने ध्वस्त किया. 1990 से 2016 तक वह लगातार पाकिस्तान और भारत के बीच आता-जाता रहा. हमले के बाद उसके कई सहयोगियों को हिरासत में लिया गया है. वह सिक्योर्ड ऐप्स के ज़रिए पाकिस्तान से अपने नेटवर्क के लोगों से संवाद करता है.
जितेंद्र बहादुर सिंह