देश की राजधानी दिल्ली में सर्दी का सितम जारी है. पारा लुढ़ककर 4.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और कड़ाके की ठंड पड़ रही है. दिल्ली की सर्दी ने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. शीतलहर के चलते पिछले कई दिनों से कंपाने वाली ठंड से लोग परेशान हैं. ऐसे में दिल्ली की सर्द रात में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो खुले आसमान के नीचे सोने के लिए मजबूर हैं.
रैन बसेरे में 30 लोगों के रहने की जगह
दिल्ली की सर्द रात में सड़क पर सोने को मजबूर लोगों की हकीकत जानने के लिए आजतक की टीम आधी रात को एम्स अस्पताल के बाहर बने रैन बसेरे में पहुंची. इस रैन बसेरे में 15 बेड थे, जिस पर तीस लोग सो रहे थे. रैन बसेरे के केयर टेकर के मुताबिक, एक बेड पर दो लोगों के सोने की जगह है. ऐसे में रैन बसेरा फुल है.
हालांकि रैन बसेरे के अंदर भी लोग हल्के कंबल में सो रहे थे लेकिन रैन बसेरे के ठीक बाहर कुछ लोग ऐसे थे जो खुले आसमान के नीचे सो रहे थे. वो लोग सर्द रात काटने के लिए जमीन पर महज एक हल्के कंबल या पॉलिथीन ओढ़कर सोने को मजबूर थे.
इलाज कराने आई महिला को रैन बसेरे में नहीं मिली जगह
देहरादून से आई एक बुजुर्ग महिला को जब रैन बसेरे में जगह नहीं मिली तो वो रैन बसेरे के बाहर बस स्टॉप पर एक कंबल में सोने को मजबूर हुई. बुजुर्ग महिला ने बताया कि वह इलाज कराने आई है, रैन बसेरे में जगह ना मिलने पर पिछले तीन दिनों से वह इसी तरह खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है.
ऐसे कुछ और लोग भी रैन बसेरे के बाहर हल्के कंबल ओढ़कर रात काटने को मजबूर थे. एक तरफ जहां सर्दी की रात में खुले आसमान के नीचे इंसान सो रहे थे तो वहीं उनके बीच में घुसकर सर्दी से बचने की कोशिश में एक कुत्ता भी सो रहा था.
इतनी ठंड में इस तरह सड़क पर सोने और खुले आसमान के नीचे सर्दी की रात काटने को मजबूर लोगों की परेशानी से सवाल खड़ा होता है कि आखिर सरकार का ध्यान क्यों नहीं जाता. क्या सरकार ठंड से लोगों के मरने का इंतजार कर रही है.
पुनीत शर्मा