दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और कोरोना वायरस की स्थिति पर चर्चा के लिए आज विधानसभा का एक-दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है. विधानसभा का विशेष सत्र काफी हंगामेदार होने की संभावना है, क्योंकि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के विधायक एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ एक प्रस्ताव ला सकते हैं.
इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में पिछले महीने हुई हिंसा को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के विधायक एक-दूसरे पर निशाना साध सकते हैं. इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की जान चुकी है और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं. अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद दिल्ली विधानसभा का ये पहला विशेष सत्र है.
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कोरोना वायरस पर भी होगी चर्चा
माना जा रहा है कि विधायक कोरोना वायरस की स्थिति और संक्रमण से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर भी चर्चा होगी. दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि एनआरसी के मुद्दे पर 13 मार्च को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है. कोरोनोवायरस पर भी चर्चा होगी. बजट सत्र पर निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन यह 25 मार्च के आसपास आयोजित हो सकता है.
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एनपीआर के दस्तावेज जरूरी नहीं
हालांकि, इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनपीआर पर कहा कि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के लिए किसी नागरिक को दस्तावेज नहीं दिखाना होगा. साथ ही किसी नागरिक को संदिग्ध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा. इससे डरने की जरूरत नहीं है. इसमें कोई डी नहीं लगेगा, यानी डाउटफुल नहीं लिखा जाएगा.
बिहार में एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पास
इससे पहले बिहार की नीतीश सरकार ने एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था. बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा. इसके अलावा एनपीआर को भी 2010 के पुराने प्रारूप के अनुरूप ही लागू किया जाएगा. नीतीश कुमार ने कहा था कि प्रदेश सरकार ने केंद्र को एनपीआर के फॉर्म में विवादित खंड को हटाने का निवेदन किया है.
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