नए साल की शुरुआत के साथ ही जेएनयू में एक नये विवाद ने जन्म ले लिया. जेएनयू प्रशासन ने 8 जनवरी से सभी छात्रों के लिए क्लास में 75 फीसद उपस्थिति अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था लेकिन क्लास में अनिवार्य उपस्थिति का ये आदेश जेएनयू के कुछ छात्रों को रास नहीं आ रहा है.
जेएनयू छात्रसंघ शुरुआत से ही इस आदेश का विरोध कर रहा था. लिहाजा जेएनयू छात्रसंघ की तरफ से आदेश के खिलाफ एक यूनिवर्सिटी स्ट्राइक बुलाया गया. सोमवार को जब छात्रसंघ अपने जाने-माने अंदाज में स्कूलों के बाहर यूनिवर्सिटी स्ट्राइक कर विरोध जताने पहुंचे तो जेएनयू के हर स्कूल के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात थे. सिविल ड्रेस में भी महिला पुरुष सुरक्षा गार्ड की तैनाती की गई थी.
आपको बता दें कि यूनिवर्सिटी स्ट्राइक के एलान के बाद जेएनयू के रजिस्ट्रार ने सुरक्षा अधिकारियों को एक सर्कुलर भेजकर 15 जनवरी को स्कूलों के बाहर तैनात रहने को बोला था, ताकि जो छात्र क्लास अटेंड करना चाहते हैं, उन्हें जबरदस्ती क्लास बॉयकॉट ना कराई जाए. रजिस्ट्रार के इस सर्कुलर से छात्रसंघ और भड़क गया. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष गीता कुमारी ने सीधा वीसी एम जगदीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि RSS समर्थक वीसी का आदेश नहीं माना जा सकता.
विरोध को मजबूत बनाने के इरादे से जेएनयू के छात्रों ने जगह-जगह पेंटिग्स बनाकर वीसी के खिलाफ नारे लिखे. कहीं बॉयकॉट अटेंडेंस लिखा गया, तो कहीं वीसी को संघ समर्थक बताया गया. इतना ही नहीं छात्रों ने विरोध का हर नायाब तरीका अपनाया. विरोध जताने के लिए जेएनयू छात्रसंघ ने अनिवार्य उपस्थिति वाले सर्कुलर की कॉपी जलाकर वीसी को RSS समर्थक बताते हुए खाकी पैंट (शाखा की ड्रेस) लेकर प्रदर्शन किया. साथ ही विरोध के दौरान छात्रों ने अटेंडेस भी लिया.
हाल ही में इस सर्कुलर को लेकर जेएनयू छात्रसंघ अपना विरोध जताने के लिए वीसी दफ्तर हाजिरी लगाने भी पहुंचा था. इस पर जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष गीता कुमारी समेत अन्य पदाधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस सौंपा गया है. एक तरफ जेएनयू छात्रसंघ इस आदेश का विरोध कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ JNUTA यानी जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन अनिवार्य 75 फीसद उपस्थिति के मुद्दे पर छात्रसंघ के साथ खड़ा है. मौजूदा समय में जेएनयू प्रशासन किसी भी सूरत में फैसला वापस लेने की स्थिति में नहीं है.
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