JNU विवाद: कन्हैया, उमर और अर्निबान को नहीं मिली राहत, कुछ छात्रों का जुर्माना घटा

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष को उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अपीलीय समिति ने एक साल के लिए हॉस्टल से निष्कासित किया है. जबकि जुर्माने की राशि 20 हजार से घटाकर 15 हजार की गई है.

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छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार

रोशनी ठोकने

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST

दिल्ली स्थि‍त जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी विवाद में दोषी पाए गए 21 छात्रों की सजा अपीलीय प्राधिकरण ने बरकरार रखी है. हालांकि, कुछ छात्रों के जुर्माने की राशि जरूर घटा दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, अपीलीय कमेटी ने छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान की सजा में कोई बदलाव नहीं किया है.

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष को उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अपीलीय समिति ने एक साल के लिए हॉस्टल से निष्कासित किया है. जबकि जुर्माने की राशि 20 हजार से घटाकर 15 हजार की गई है. जेएनयू छात्रसंघ के जनरल सेक्रेटरी रामा नागा, आइसा के छात्र नेता अनंत कुमार, श्वेता राज और चिंटू कुमारी के जुर्माने की राशि भी घटाई गई है जबकि एबीवीपी के छात्रनेता और जेएनयूएसयू के संयुक्त सचिव सौरभ शर्मा के जुर्माने की राशि घटाकर 10 हजार से 5 हजार की गई है.

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उमर खालिद एक सेमेस्टर से निष्कासित
जेएनयू की उच्च स्तरीय समिति ने अफजल गुरु समर्थित विवादास्पद कार्यक्रम में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत 21 छात्रों को दोषी पाया था. यूनिवर्सिटी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर 10 हजार का जुर्माना लगाया था, वहीं उमर खालिद को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया गया था. उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. इसी तरह अनिर्बान भट्टाचार्य को 15 जुलाई तक के लिए निष्कासित किया गया और 23 जुलाई के बाद उसे पांच साल तक संस्थान परिसर में आने से रोक दिया गया.

वीसी के पास अपील का मिला था मौका
भट्टाचार्य को उसकी थीसिस पूरी करने के लिए 16 जुलाई से 22 जुलाई तक केवल एक सप्ताह का समय दिया गया. उच्च स्तरीय जांच समितिहा के सुझावों के आधार पर मिली सजा को छात्रों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने सजा पर रोक लगाते हुए छात्रों को जेएनयू वीसी के पास एक बार फिर से अपील करने का मौका दिया था.

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यूनि‍वर्सिटी ने छात्रों से मांगी अंडरटेकिंग
हालांकि, अपीलीय प्राधिकरण की रिपोर्ट में भी कोई बड़ा फेरबदल नहीं हुआ. सजा की जानकारी जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर की तरफ से सभी दोषी छात्रों को दे दी गई है. साथ ही यूनिवर्सिटी ने छात्रों से अंडरटेकिंग भी मांगी है कि वे भविष्य में यूनिवर्सिटी के नियमों का पालन करेंगे. जुर्माना घटाने के बाद भी सजा कायम होने के कारण इस बात की पूरी संभावना है कि प्रशासन बनाम छात्रों की लड़ाई एक बार फिर कानूनी दांवपेंच में उलझे.

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