दिल्ली: नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में डॉक्टरों का प्रदर्शन

डॉक्टरों का कहना है कि इस बिल के आते ही देशभर में इलाज का स्तर नीचे चला जाएगा. क्योंकि इस बिल में प्रावधान है कि 6 महीने का ब्रिज कोर्स करके कोई भी आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टर एलोपैथी की भी दवा लिख सकेगा.

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एकजुट हुए डॉक्टर एकजुट हुए डॉक्टर

सना जैदी / अंकित यादव

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST

केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (एनएमसी) के विरोध में दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में रविवार को बीस हजार डॉक्टर एकजुट हुए.

डॉक्टरों का कहना है कि इस बिल के आते ही देशभर में इलाज का स्तर नीचे चला जाएगा. क्योंकि इस बिल में प्रावधान है कि 6 महीने का ब्रिज कोर्स करके कोई भी आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टर एलोपैथी की भी दवा लिख सकेगा.

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पूरे देश के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पदाधिकारी इस कार्यक्रम में जुटे जहां डॉक्टरों ने जोर शोर से केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे इस बिल का विरोध किया. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि वानखेड़े ने कहा कि इस बिल के आते ही पुरानी संस्था मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया खत्म हो जाएगी. उसके बाद देश की मेडिकल शिक्षा और सेवा जैसी नीतियों को बनाने की जिम्मेदारी इस नई संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन के हाथ में आ जाएगी. इस कमीशन के सभी सदस्य सरकार अपॉइंट करेगी. ऐसे में सरकार के पास इसका पूरा कंट्रोल रहेगा.

क्या हैं नए बिल की खास बातें

-इस बिल के आते ही पूरे देश के मेडिकल संस्थानों में दाख़िले के लिए सिर्फ एक परीक्षा ली जाएगी. इस परीक्षा का नाम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (NEET)होगा.

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-मेडिकल कोर्स यानी ग्रेजुएशन खत्म करने के बाद भी प्रेक्टिस करने के लिए एक और परीक्षा देनी होगी. इस परीक्षा को पास करने के बाद ही प्रेक्टिस करने का लाइसेंस मिल पाएगा. साथ ही पोस्ट ग्रेजुएशन की भी अनुमति मिल पाएगी.

-यह संस्था देश के निजी मेडिकल कॉलेजों की 40 प्रतिशत सीटों की फीस भी तय करेगा. जबकि बाकी 60 प्रतिशत सीटों की फीस तय करने का अधिकार मेडिकल कॉलेज का होगा.

-इस बिल के आते ही 6 महीने का एक ब्रिज कोर्स करने के बाद देश के आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टर भी MBBS डॉक्टर की तरह एलोपैथी दवाएं लिख सकेंगे.

गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी डॉक्टरों की संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस बिल की खिलाफत करने का फैसला कर लिया है तो ऐसे में केंद्र सरकार ने अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो मुश्किल खड़ी हो सकती है.

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