दिल्ली में UP सिंचाई विभाग के जमीन खाली कराने के नोटिस पर दफ्तर पहुंचे लोग

उत्तर प्रदेश सरकार के यूपी सिंचाई विभाग की ओर से पिछले दिनों दिल्ली के कई इलाकों में लगाए गए जमीन खाली करने के नोटिस को लेकर इन इलाके के लोगों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की. साथ ही पिछले कई सालों से इन कॉलोनियों में रहने का दस्तावेज अधिकारियों को पेश किए.

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सिंचाई विभाग के दफ्तर पहुंचे कॉलोनियों के लोग सिंचाई विभाग के दफ्तर पहुंचे कॉलोनियों के लोग

मोनिका गुप्ता / सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 5:03 AM IST

उत्तर प्रदेश सरकार के यूपी सिंचाई विभाग की ओर से पिछले दिनों दिल्ली के कई इलाकों में लगाए गए जमीन खाली करने के नोटिस को लेकर इन इलाके के लोगों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की. साथ ही पिछले कई सालों से इन कॉलोनियों में रहने का दस्तावेज अधिकारियों को पेश किए.

दरसल, पिछले दिनों पूर्वी दिल्ली के खुरेजी ग्राम और इसके साथ-साथ दिल्ली के 8 गांवों की ज़मीन पर उत्तर प्रदेश की सरकार के सिंचाई विभाग ने अपना दावा किया था. यहां नोटिस चस्पा कर यहां रहने वाले लोगों को ज़मीन खाली करने के लिए कहा था. जिसके बाद यहां रहने वाले लोग काफी परेशान हैं.

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इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के मुताबिक, ये लोग पिछले तकरीबन 50 सालों से यहां रह रहे हैं. पूर्वी दिल्ली के जगतपुरी और खुरेजी ग्राम में रहने वालों लोग नोटिस लगने बाद  से तनाव में हैं. इनके तनाव की मुख्य वजह इनकी कॉलोनियों में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए नोटिस हैं. इनमें उत्तर प्रदेश सरकार ने खुरेजी ग्राम की लगभग 3 हेक्टेयर जमीन पर अपना मालिकाना हक होने का दावा किया गया था. यहां के लोगों को ये जमीन एक महीने में खाली करने के लिए कहा है.

इस मामले को लेकर जब सिंचाई विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर का कहना था कि दिल्ली के 8 गांवों में तकरीबन 20 हेक्टेयर जमीन यूपी सिंचाई विभाग की है. जिसको यूपी सरकार की ओर से खाली करने का नोटिस दिया गया है. साथ ही इन अधिकारियों का कहना था कि अगर कोई अपना मकीकन हक इस जमीन को लेकर दसतावेज पेश करता है उसको एक मौका दिया जाएगा.

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दिल्ली की कई कॉलोनियों में लगे नोटिस से साफ होता है कि ग्राम के कई खसरे उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के हैं. इस नोटिस में सभी खसरा नंबर का जिक्र है. इन खसरों पर अब कई मकान बन चुके हैं और इन मकानों में हज़ारों लोग रह रहे हैं. इतना ही नहीं इन खसरों पर बनी जमीन रेगुलाइज हैं और यहां मकानों की खरीद फरोख्त बाकायदा पक्की रजिस्ट्री से होती है. इन मकानों में रहने वाले लोग अब पुराने बिजली- पानी के बिल और रजिस्ट्री निकाल कर दर-दर सरकारी दरफ़्तरों के चक्कर लगा रहे हैं.

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