दिवाली पर पटाखों की बिक्री फुस्स रहने के आसार, कम डिमांड से विक्रेता मायूस

अगर पटाखों की बाजार में स्थिति देखी जाए तो अभी तक उनकी खरीद के लिए कोई खास उत्साह नहीं दिखा है. इस साल कोरोनावायरस के प्रकोप की वजह से स्थिति भी असाधारण है.

Advertisement
बिक्री में आई कमी बिक्री में आई कमी

राम किंकर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 9:46 PM IST
  • ग्रीन पटाखे हुए 15 से 40 फीसदी तक महंगे
  • कोरोना का त्योहार के उत्साह पर पड़ रहा असर
  • गुरुग्राम में भी होगी केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री 

दिवाली पर हर साल पटाखे जलाने से हवा में प्रदूषण का जहर बढ़ जाता है. लेकिन पिछले कुछ साल से लोगों में जागरूकता बढ़ी है. साथ ही अदालतों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी इस मुद्दे का संज्ञान लिया है. ग्रीन पटाखों पर जोर दिया गया लेकिन उनके दाम परंपरागत पटाखों से अधिक बैठते हैं.

इस साल के लिए एनजीटी ने सरकारों से पूछा है कि क्यों न 7 नवंबर से 30 नवंबर तक पटाखों को जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बैन कर दिया जाए? अगर पटाखों की बाजार में स्थिति देखी जाए तो अभी तक उनकी खरीद के लिए कोई खास उत्साह नहीं दिखा है. इस साल कोरोनावायरस के प्रकोप की वजह से स्थिति भी असाधारण है.

Advertisement

आजतक/इंडिया टुडे ने इस संबंध में बाजारों में जाकर रियलिटी चेक किया. वैसे तो आम पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखे महंगे ही मिलते हैं. लेकिन कोरोनाकाल में ग्रीन पटाखों के दाम 15- 40 फीसदी और अधिक हो गए हैं. ऊपर से कस्टमर खास न होने की वजह से मार्केट में डिमांड भी कम है.

इस साल कई महीने लॉकडाउन रहने, आर्थिक स्थिति में गिरावट, कई घरों में बीमार होने की वजह से लोग त्योहार सादे ढंग से मना रहे हैं. ऐसे में पटाखे बेचने वालों को अधिक कारोबार की उम्मीद नजर नहीं आती. सर्दी की दस्तक के साथ ही पराली जलने से हवा में प्रदूषण का जहर भी बढ़ जाता है. इसका असर भी पटाखों की बिक्री पर पड़ता है.

देखें: आजतक LIVE TV

विश्वास नगर में पटाखों के होलसेलर शीतला प्रसाद संजय कुमार जैन ने इस सबंध में टिप्पणी की, “दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर ऐसा लगता है जैसे हम पटाखे नहीं, अफीम बेच रहे हों.” जैन कहते हैं, “पिछले साल सिर्फ ग्रीन पटाखों की दो ही वेरायटी- फुलझड़ी और अनार ही थी, लेकिन इस बार ग्रीन पटाखों की बहुत वेरायटी है.

Advertisement

इनमें चकरी, मिट्टी के अनार, छोटे बुलेट बम, स्काईशॉट, 13 शॉट, 50 शॉट, 80 शॉट, 100 शॉट वाले ग्रीन पटाखे भी हैं. बच्चों के लिए लूज बम भी आ गए हैं. बावजूद इसके कस्टमर नहीं आ रहे. लोगों के पास पैसा भी कम है. कोरोना में पटाखा मैनुफैक्चरिंग कम हुई है, लिहाजा पटाखे बिकेंगे या नहीं इसमें संशय है.”  

सदर बाजार क्रैकर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी और रिटेलर एचएस छाबड़ा का कहना है कि “ग्रीन पटाखा 15-40 प्रतिशत महंगा हो गया है. फुलझड़ी जो पहले 200 की मिलती थी, कोरोना के दौर में 250 रुपये की मिल रही है. वजह माल की शॉर्टेज है डिमांड भी कम है. महामारी की मार से लोग आ नहीं रहे हैं.”

दिल्ली सरकार ने दी है ग्रीन पटाखों की बिक्री की इजाजत

जामा मस्जिद के पास पटाखा होलसेलर अमित जैन के मुताबिक माल कम आ रहा है. सिर्फ 20 फीसदी माल ही आया है. कोई खरीदना नहीं चाह रहा है. जितना माल आया है, वो भी बिक नहीं रहा. लगता है इस बार फीकी दिवाली होगी.”

दिल्ली सरकार ने खराब एयर क्वॉलिटी को देखते हुए सिर्फ ग्रीन पटाखों की इजाज़त दी है. बता दें कि ग्रीन पटाखे आम पटाखों की अपेक्षाकृत 30 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं, क्योंकि इनमें बोरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल नहीं होता है. इन पटाखों को बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है.

Advertisement

ग्रीन पटाखों को आम पटाखों से अलग इनके स्पेशल क्यूआर कोड, विशेष सर्टिफाइड नंबर और ग्रीन लोगो से पहचाना जाता है. कोड के स्कैन के बाद कंपोजिशन के बारे में पता लगता है. कुछ कंपोजिशन प्रदूषण को 90 फीसदी कम कर देते हैं. एक पटाखा विक्रेता ने बताया कि सिवाकासी के बनने वाले पटाखे अपने मटीरियल की वजह से महंगे होते हैं.     

दशहरे के करीब ही मिल गया था लाइसेंस

पटाखा विक्रेताओं को इस साल दशहरे के आस-पास ही लाइसेंस मिल गया, नहीं तो अक्सर दीवाली के कुछ दिन पहले ही लाइसेंस मिला करते थे. पर्यावरण से संबंधित मुद्दों से जुड़े एक वकील ने बताया कि ग्रीन पटाखों में केमिकल कम डालने की वजह से जलाने पर नाम मात्र का धुआं निकलता है जो असर नहीं करता.

होलसेलर एसएस छाबड़ा ने कहा कि कोविड-19 के चलते पटाखा विक्रेताओं का कारोबार फीका रहने की संभावना है. केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सीएसआईआर-नीरी के वैज्ञानिकों ने आधिकारिक तौर पर पिछले साल 5 अक्टूबर को ग्रीन पटाखे लॉन्च किए थे. अधिक लागत की वजह से ग्रीन पटाखे पिछले साल बाजार में ठीक से नहीं पहुंच पाए थे और बिक्री कमतर ही रही थी.

ग्रीन पटाखों के लाइसेंस प्राप्त व्यापारी ही कर सकेंगे बिक्री

Advertisement

दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम में भी केवल ग्रीन पटाखों के लाइसेंस प्राप्त व्यापारी ही पटाखे बेच सकेंगे. अन्य पटाखों और लड़ियों की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा. गुरुग्राम के जिलाधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं.

इस आदेश के मुताबिक केवल दिवाली यानी 14 नवंबर की रात 8 से 10 बजे के बीच ही पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी. इस आदेश का उल्लंघन करने पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1884 के तहत कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन की शिकायत नगर निगम के टोल फ्री नंबर 18001802738 पर कर सकता है.

(गुरुग्राम से नीरज वशिष्ठ के इनपुट के साथ)

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement