कोरोना वायरस की महामारी ने दुनिया में बहुत कुछ बदल दिया है. अब लोगों का आउटिंग और बाहर जाकर खाना खाने का अंदाज भी वैसा नहीं रहा, जैसा कि इस महामारी की दस्तक से पहले हुआ करता था. अनलॉक से जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों के बावजूद कुछ सेक्टर बदहाली का सामना कर रहे हैं. इनमें टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर प्रमुख हैं.
देश के कई राज्यों में बड़े-बड़े होटल खोलने की अनुमति हाल फिलहाल में ही दी गई है. रेस्टोरेंट्स और होटल भी महीनों बाद खुले हैं. यहां लजीज व्यंजन बनाने वाले शेफ भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं. कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से इन्हें भी बेरोजगारी का सामना करना पड़ा. अब कई शेफ आपके घर पर ही आकर अपने हाथों का जायका चखाने के लिए तैयार हैं.
इस सोच के पीछे शिवम सिंह नाम के शख्स हैं. उन्होंने कई जाने-माने शेफ को एक कड़ी में जोड़कर इस कॉन्सेप्ट को मूर्त रूप दिया है. इसमें आप अपने घर पर ही पार्टियों, बर्थडे फंक्शन या अन्य मौकों पर इन शेफ की सर्विस ले सकते हैं. वह बताते हैं कि अभी यह सेवा दिल्ली एनसीआर में शुरू की गई है. आगे चलकर इसे देश के टियर 2 और टियर 3 के अन्य शहरों में भी उपलब्ध कराया जाएगा.
कैसे आया आइडिया?
घरों पर ही कैटरिंग में शेफ के इस्तेमाल का आइडिया कैसे आया, इस पर शिवम सिंह कहते हैं कि कोरोना से पहले अक्सर हम वीकेंड पर लंच या डिनर बाहर ही करना पसंद करते थे. पर इस लॉकडाउन ने सब बदल दिया.एक रात सोच रहा था कि वो शेफ जो हमारे लिए इतनी बढ़िया डिशेज बनाते थे, वो इस महामारी में कितने परेशान होंगे? न जाने कब कोरोना की वैक्सीन आएगी? कब जिंदगी पटरी पर लौटेगी. फिर सोचा कि उनकी टेक्नोलॉजी से किस प्रकार सहायता कर सकते हैं? और तब एक आइडिया आया कि क्यों न इन्हें उन लोगों से डायरेक्ट जोड़ा जाए, जिन्हें इनकी आवश्यकता है.
हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में कई तरह के नए प्रयोग कर इस सेक्टर को ऑक्सीजन देने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं, इस नए प्रयोग से शेफ को अपनी स्किल्स और अनुभव के अनुसार आर्थिक सहारा मिल रहा है. वहीं, लोग इस महामारी के दौर में भी अपने घर में ही अपने फेवरेट रेस्टोरेंट या फाइव स्टार होटल के व्यंजनों का लुत्फ ले सकते हैं. शिवम का कहना है कि लोग बर्थडे पार्टी, एनिवर्सरी और कैंडल लाइट डिनर के लिए शेफ बुक कर रहे हैं. शेफ दरबारी के साथ 100 से ज्यादा शेयर रजिस्टर होकर काम कर रहे हैं. ये सभी दिल्ली एनसीआर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
विदेश में जॉब जाने से लौटना पड़ा स्वदेश
दुबई के एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट में किचन ऑपरेशन मैनेजर का काम करने वाले गौरव शर्मा कहते हैं कि वहां आमदनी तब अच्छी थी और घर का गुजरा काफी अच्छे से होता था. सेविंग भी हो जाती थी. कोरोना की वजह से जॉब चली गई और दुबई से लौटना पड़ा. यहां आकर जॉब ढूंढ़ना शुरू किया तो होटल लाइन की खस्ता हालत होने की वजह से कहीं बात नहीं बन पा रही थी. इस टाइम जॉब मिलना काफी मुश्किल हो गया. दिव्यांत रथ की भी कुछ ऐसी ही कहानी है. वह बताते हैं कि कोरोना के कारण जॉब चली गई और उन्हें भारत लौटना पड़ा.
आशुतोष मिश्रा