दिल्ली सरकार से नोटिस मिलने के बाद सचिवालय पहुंचे IAS आशीष मोरे, SC के आदेश का पालन करने पर जताई सहमति 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संपर्क से कट गए IAS अधिकारी आशीष मोरे आखिरकार सोमवार की दोपहर अचानक सचिवालय स्थित अपने दफ्तर में आए और कारण बताओ नोटिस मिलने की बात स्वीकार की.

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कारण बताओ नोटिस के बाद हाजिर हुए आईएएस आशीष मोरे (फाइल फोटो) कारण बताओ नोटिस के बाद हाजिर हुए आईएएस आशीष मोरे (फाइल फोटो)

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2023,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

दिल्ली सरकार ने कई दिनों से गायब सर्विसेज विभाग के सचिव और सीनियर IAS अधिकारी आशीष मोरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. नोटिस में अधिकारी से पूछा गया कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों ना शुरू की जाए? नोटिस जारी होने के बाद आशीष मोरे सामने आए और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने पर सहमति जताई है.  

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सौरभ भारद्वाज द्वारा आशीष मोरे की जगह नए सर्विसेज सेक्रेटरी की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए, जिसकी उन्होंने अवहेलना की थी. निर्देश दिए जाने पर अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों को छोड़कर आशीष मोरे रहस्यमय तरीके से दिल्ली सचिवालय से गायब हो गए थे. अधिकारियों द्वारा संपर्क किए जाने पर उनकी पत्नी ने कहा था कि आशीष मोरे के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.  

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद संपर्क से कट गए आशीष मोरे आखिरकार सोमवार की दोपहर अचानक सचिवालय स्थित अपने दफ्तर में आए और कारण बताओ नोटिस मिलने की बात स्वीकार की. उन्होंने सुप्रीम अदालत के निर्णय को मानने और नए सर्विसेज सेक्रेटरी की तैनाती को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने की बात कही. 

नोटिस में क्या कहा गया है?

नोटिस में कहा गया है कि आशीष मोरे को सर्विस विभाग में नए सचिव की तैनाती के लिए फाइल पेश करने के निर्देश दिए गए थे. उन्होंने इस पर सहमति भी जताई थी, लेकिन मंत्री के सामने फाइल पेश करने की बजाय वह बिना सूचना के सचिवालय से चले गए. 

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इसके साथ ही नोटिस में यह भी कहा गया कि आशीष मोरे ने जानबूझकर फोन कॉल का जवाब नहीं दिया. बाद में फोन स्विच ऑफ कर लिया. उनके घर पर एक ऑफिशियल नोट भेजा गया, लेकिन घर पर मौजूद होते हुए भी उन्होंने इसे रिसीव नहीं किया. बाद में मोरे को ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए नोटिस भेजा गया. 

24 घंटे के अंदर मांगा जवाब 

आगे कहा गया कि आशीष मोरे पॉलिटिकली न्यूट्रल नहीं हैं. उन्होंने जानबूझकर संविधान की सही स्थिति को लागू ना करने का फैसला किया. मोरे ने खुद तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू नहीं करवाया, साथ ही अपने अधीनस्थ स्पेशल सेक्रेट्री सर्विसेज से एक नोट जारी करके कहलवाया कि गृह मंत्रालय के निर्देश नहीं आए हैं. इसलिए सर्विस मिनिस्टर के निर्देश लागू नहीं किए जा सकते. नोटिस में मोरे से 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुनाया था फैसला?  

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों की लड़ाई को लेकर फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से ये फैसला दिया था कि दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार केजरीवाल सरकार के पास ही रहेगा. उसके बाद केजरीवाल सरकार एक्शन में आ गई. AAP सरकार के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में प्रशासनिक फेरबदल की घोषणा की थी. 

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