'बाहर आने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं विभव', अदालत ने खारिज की जमानत याचिका

तीस हजारी कोर्ट में जज गौरव गोयल की अदालत ने विभव की जमानत याचिका खारिज करते हुए दस बिंदुओं पर जोर दिया. अदालत ने आदेश में कहा है कि पीड़िता एक महिला है. वह आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद भी हैं. वह अपने ही राजनीतिक दल के मुख्यमंत्री से उनके आवास पर मिलने गई थीं.

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विभव कुमार (फाइल फोटो) विभव कुमार (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 07 जून 2024,
  • अपडेटेड 11:13 PM IST

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट के मामले में गिरफ्तार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी विभव कुमार की जमानत याचिका खारिज हो गई है. दिल्ली की तीस हजारी सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को विभव कुमार की याचिका खारिज कर दी.

तीस हजारी कोर्ट में जज गौरव गोयल की अदालत ने विभव की जमानत याचिका खारिज करते हुए दस बिंदुओं पर जोर दिया. अदालत ने आदेश में कहा है कि पीड़िता एक महिला है. वह आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद भी हैं. वह अपने ही राजनीतिक दल के मुख्यमंत्री से उनके आवास पर मिलने गई थीं.

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कोर्ट ने स्वाति मालीवाल के आरोपों पर किया विचार

कोर्ट ने उनके आरोपों पर विचार किया कि विभव कुमार ने मुख्यमंत्री आवास के ड्राइंग रूम में उनके साथ मारपीट की और बेरहमी से पिटाई कर उन्हें चोट पहुंचाई. कोर्ट ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि विभव कुमार मुख्यमंत्री के निजी सचिव हैं और उन पर न केवल उसी पार्टी के संसद सदस्य, बल्कि एक महिला के साथ भी दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है.

इसके अलावा स्वाति की डाक्टरी जांच रिपोर्ट जिसके अनुसार पीड़िता को लगी चोटें स्पष्ट हैं. विभव कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भी विचार किया गया. विभव पर आईपीसी की धारा 308/341/354/ 354-बी/506/509/201 के तहत आरोप लगाए गए हैं. ये सभी आरोप गंभीर प्रकृति के हैं.

'आम जनता के मन में पैदा होती है घबराहट'

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कोर्ट ने इस पर भी विचार किया कि विभव कुमार पर मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर राजनीतिक दल की एक महिला सदस्य के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप है. वहां न केवल उनके राजनीतिक दल के निर्वाचित सदस्य मुख्यमंत्री से मिल सकते थे बल्कि आम जनता भी अपनी शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री से मिल सकती है. इससे आम जनता के मन में अपने नेता से मिलने को लेकर डर और घबराहट पैदा होती है. इस प्रकार के आरोप भी गंभीर हैं. लगातार मिल रही धमकियों के कारण पीड़िता के मन में अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है.

विभव कुमार की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि इसकी भी पूरी आशंका है कि विभव कुमार को अगर छोड़ा गया तो वो गवाहों को प्रभावित करेंगे. लिहाजा विभव कुमार की वर्तमान जमानत याचिका में कोई योग्यता नहीं दिख रही है. अत: आवेदक/अभियुक्त विभव कुमार की वर्तमान नियमित जमानत अर्जी खारिज की जाती है.

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