दिल्ली विधानसभा में सिख गुरुओं के सम्मान से जुड़े सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी की नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी मार्लेना पर कथित अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगने के मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है. पंजाब पुलिस ने इस प्रकरण में जालंधर में शुक्रवार को एक एफआईआर दर्ज की है. यह एफआईआर सोशल मीडिया पर वायरल किए गए एक कथित एडिटेड और डॉक्टर्ड वीडियो को अपलोड और प्रसारित करने के आरोप में दर्ज की गई है.
यह कार्रवाई जालंधर निवासी इकबाल सिंह की शिकायत के आधार पर की गई है. शिकायत में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और भड़काऊ कैप्शन डाले गए, जिनमें यह आरोप लगाया गया कि आतिशी ने सिख गुरुओं के खिलाफ अपमानजनक और ईशनिंदात्मक टिप्पणी की. शिकायत के अनुसार इन पोस्टों से धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश की गई.
पंजाब सरकार का दावा, फॉरेंसिक जांच में वीडियो निकला एडिटेड
पंजाब सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई गई. सरकार के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा के एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो को डाउनलोड कर पंजाब के फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी, एसएएस नगर भेजा गया. फॉरेंसिक जांच में सामने आया कि वीडियो में आतिशी द्वारा ‘गुरु’ शब्द का उच्चारण ही नहीं किया गया था. सरकार का दावा है कि वीडियो के साथ जानबूझकर ऐसे कैप्शन जोड़े गए, जो आतिशी ने कभी नहीं कहे.
पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार का कहना है कि यह वीडियो जानबूझकर डॉक्टर्ड किया गया ताकि धार्मिक भावनाएं भड़काई जा सकें और राजनीतिक लाभ लिया जा सके. इसी आधार पर पंजाब पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.
जालंधर में दर्ज हुई FIR, सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट का आरोप
यह पूरा विवाद 6 जनवरी 2026 को उस समय शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो क्लिप वायरल हुए. इन वीडियो में दावा किया गया कि दिल्ली विधानसभा में सिख गुरुओं के सम्मान में चल रहे सत्र के दौरान आतिशी ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. यह सत्र श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था. वीडियो सामने आते ही खासकर पंजाब में सिख समुदाय और राजनीतिक हलकों में नाराजगी देखने को मिली.
इस विवाद की जड़ भाजपा नेता कपिल मिश्रा का एक सोशल मीडिया पोस्ट बना, जिसमें उन्होंने दावा किया कि विधानसभा में गुरुओं के सम्मान के दौरान आतिशी ने बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक भाषा का प्रयोग किया. पोस्ट में वीडियो के साथ यह सवाल भी उठाया गया कि क्या ऐसी व्यक्ति को विधानसभा जैसे पवित्र सदन में रहने का अधिकार है. यह पोस्ट तेजी से वायरल हुआ और राजनीतिक विवाद गहराता चला गया.
बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के पोस्ट से बढ़ा राजनीतिक बवाल
पंजाब में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आतिशी का बचाव करते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर वीडियो को गलत तरीके से पेश किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि आतिशी ने गुरु तेग बहादुर जी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और वीडियो में गुरु का नाम झूठे तरीके से जोड़ा गया.
दूसरी ओर कांग्रेस नेता और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आम आदमी पार्टी और आतिशी पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर आतिशी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की. रंधावा ने आरोप लगाया कि यह बयान करोड़ों सिखों की आस्था पर सीधा हमला है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है. उन्होंने इस मामले की विशेष जांच टीम से 90 दिनों की जांच कराने की भी मांग की.
सीएम भगवंत मान ने किया बचाव, बोले गुरु का नाम जोड़ा गया झूठा
पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता फतेह जंग सिंह बाजवा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक बयान का मामला नहीं बल्कि मानसिकता का सवाल है. वहीं भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल ने आतिशी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इस्तीफे और माफी की मांग की.
दिल्ली के भाजपा मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी आतिशी की भाषा को अस्वीकार्य बताया और कहा कि इससे राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंची है. उन्होंने आरोप लगाया कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत पर चर्चा से बचने की कोशिश की गई. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी 7 जनवरी को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात कर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की.
पंजाब और दिल्ली में सियासी टकराव, विपक्ष ने की कार्रवाई की मांग
फिलहाल पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद यह मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. एक ओर पंजाब सरकार डॉक्टर्ड वीडियो का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे विवाद में जिम्मेदारी किसकी बनती है.
कमलजीत संधू