सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर दिल्ली सरकार का बयान- LNJP अस्पताल में ठीक हुए 2100 कोरोना मरीज

दिल्ली सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने गुरुवार को एलएनजेपी अस्पताल का दौरा किया था. टीम अस्पताल में मरीजों के लिए की गई व्यवस्था से संतुष्ट थी.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटोः पीटीआई) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटोः पीटीआई)

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2020,
  • अपडेटेड 12:26 AM IST

  • कहा- मानवाधिकार आयोग की टीम ने जताया था संतोष
  • अस्पताल में कोई कमी सामने आती है तो करेंगे कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल समेत देश के कई अस्पतालों को नोटिस जारी कर भर्ती मरीजों की स्थिति पर जवाब तलब किया है. कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिव और अस्पताल के निदेशक से स्टाफ की डिटेल भी मांगी है. अब दिल्ली सरकार ने कोर्ट के नोटिस को लेकर बयान जारी किया है.

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दिल्ली सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को सम्मान और पूरी ईमानदारी के साथ स्वीकार करते हैं. दिल्ली सरकार सभी के लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने और कोरोना के रोगियों को हर संभव उपचार सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है. इसके बावजूद भी अगर अस्पताल में कोई भी कमी हमारे सामने आती है, तो हम उस पर तुरंत कार्रवाई करेंगे.

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दिल्ली सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने गुरुवार को एलएनजेपी अस्पताल का दौरा किया था. टीम अस्पताल में मरीजों के लिए की गई व्यवस्था से संतुष्ट थी. हम सुप्रीम कोर्ट को इस रिपोर्ट से अवगत कराएंगे. सरकार का दावा है कि दिल्ली के सबसे बड़े कोरोना हॉस्पिटल एलएनजेपी में 2000 बेड आरक्षित रखे गए हैं. दिल्ली के दूसरे अस्पतालों से भी कोरोना के मरीजों को यहां रेफर किया जाता है. अस्पताल से अब तक 2100 से अधिक मरीज स्वस्थ होकर घर भेजे जा चुके हैं.

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दिल्ली सरकार ने कहा है कि यह एक असाधारण स्थिति है और सरकार पहले दिन से ही बेहतर बुनियादी ढांचा स्थापित करने, कोरोना के सभी रोगियों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की पूरी कोशिश कर रही है. कोरोना को समर्पित अस्पतालों में तैनात डॉक्टर पिछले दो महीने से अपने घर भी नहीं गए हैं और लोगों की सेवा के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सवतः संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली में शव के रख-रखाव को दुख देने वाला बताया था. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से टेस्टिंग घटाने को लेकर भी सवाल पूछे हैं.

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