लॉकडाउनः दिल्ली पुलिस ने पीसीआर वैन से गर्भवती महिला को पहुंचाया अस्पताल

साउथ दिल्ली के खरक गांव की रहने वाली रुकैया की तबीयत काफी ज्यादा खराब होने लगी तो उसके पति खालिद ने कई बार एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन एम्बुलेंस नहीं पहुंची. खालिद ने दिल्ली पुलिस को फोन किया और मदद की गुहार लगाई.

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एम्बुलेंस नहीं मिली तो पति ने किया दिल्ली पुलिस को फोन एम्बुलेंस नहीं मिली तो पति ने किया दिल्ली पुलिस को फोन

अरविंद ओझा / पुनीत शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

  • नहीं मिली एम्बुलेंस, तो पति ने की थी कॉल
  • साकेत पुलिस ने मजदूर दंपति को पहुंचाया घर

देश कोरोना वायरस से जूझ रहा है. कोरोना को मात देने के लिए सरकार ने 21 दिन का लॉकडाउन लागू किया है. इससे लोगों को असुविधा हो रही है, लेकिन इस दौरान देशभर में पुलिस का मानवीय चेहरा भी सामने आया है. दिल्ली पुलिस ने भी इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए एक गर्भवती महिला को समय रहते अपनी पीसीआर वैन से अस्पताल पहुंचाया. इसके कुछ ही समय बाद महिला ने एक बेटी को जन्म दिया.

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बताया जाता है कि यह वाकया 27 मार्च का है. साउथ दिल्ली के खरक गांव की रहने वाली रुकैया की तबीयत काफी ज्यादा खराब होने लगी तो उसके पति खालिद ने कई बार एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन एम्बुलेंस नहीं पहुंची. खालिद ने दिल्ली पुलिस को फोन किया और मदद की गुहार लगाई. दिल्ली पुलिस खालिद के घर पहुंची और गर्भवती महिला को पीसीआर वैन से अस्पताल पहुंचाया.

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रुकैया का कहना है कि वह काफी ज्यादा दर्द में थी. उसकी जान आफत में थी. रुकैया के पति खालिद ने दिल्ली पुलिस को धन्यवाद देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने सड़क, गड्ढे का खयाल रखते हुए वक्त पर अस्पताल पहुंचा दिया. इस संबंध में इंस्पेक्टर पूनम पारिख ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान कानून व्यवस्था के साथ ही गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों का भी ख्याल रखना है. सर्विस स्टाफ को बताया गया है कि गर्भवती महिलाओं को किस तरह एहतियात रखते हुए अस्पताल पहुंचाना है.

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मजदूर दंपति को नवजात समेत भेजा घर

लॉकडाउन के दौरान पेट्रोलिंग करते समय साकेत थाने के SHO केशव माथुर की नजर नवजात बच्चे के साथ सड़क किनारे बैठे दंपति पर पड़ी. एसएचओ ने दंपति को खाना खिलाया और अपनी गाड़ी में बैठा 12 किलोमीटर दूर उनके घर आया नगर स्थित डेरा गांव पहुंचाया. बताया जाता है कि रिंकी ने शनिवार की सुबह ही शिशु को जन्म दिया था. वह पैदल चलने की हालत में नहीं थी.

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